Knews Desk: डिजिटल दौर में व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसी से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निजी कंपनियों द्वारा आम लोगों के संवेदनशील EPFO और आयकर रिटर्न यानी ITR डेटा तक पहुंच को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह विशेषज्ञों की मदद से ऐसे ठोस सुरक्षा उपाय तैयार करे, जिससे लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी का गलत इस्तेमाल रोका जा सके। यह मामला एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिका में दावा किया गया कि मौजूदा डिजिटल सिस्टम के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान सत्यापित करने के लिए सिर्फ PAN या UAN नंबर उपलब्ध कराने पर निजी कंपनियों को उसके रोजगार और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मिल सकती है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कई बार यूजर को यह स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि उसका डेटा किसने और किस उद्देश्य से देखा है।याचिका में खास तौर पर EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के रिकॉर्ड और आयकर विभाग के पास मौजूद जानकारी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए। EPFO के रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति के रोजगार, नौकरी बदलने और भविष्य निधि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है। इसी तरह ITR डेटा में आय, निवेश और अन्य वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मौजूद रहती है। ऐसे डेटा का अनधिकृत इस्तेमाल किसी व्यक्ति की निजता और आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि मामला सरकारी एजेंसियों द्वारा सीधे डेटा लीक किए जाने का नहीं, बल्कि ऐसे सिस्टम का है जिसमें अलग-अलग कानूनों के तहत सरकार को दी गई निजी जानकारी तक निजी कंपनियों की पहुंच संभव हो रही है। दावा किया गया कि कुछ मामलों में डेटा एक्सेस के दौरान OTP या यूजर की स्पष्ट सहमति जैसी अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रिया भी मौजूद नहीं होती। इससे लोगों को यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि उनकी जानकारी कब और किसने एक्सेस की।सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर माना, हालांकि पीठ ने सीधे तौर पर कोई विस्तृत आदेश पारित करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि डेटा एक्सेस और उससे जुड़े सुरक्षा नियम मुख्य रूप से सरकार की नीति और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित विषय हैं। इसके बावजूद कोर्ट ने निजी कंपनियों की सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद नागरिकों की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच को लेकर चिंता जाहिर की।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को विशेषज्ञों की मदद लेने और इस समस्या से निपटने के लिए प्रभावी सुरक्षा तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया। अदालत का जोर इस बात पर है कि निजी कंपनियों को नागरिकों के संवेदनशील डेटा तक जरूरत से ज्यादा पहुंच नहीं मिलनी चाहिए और डेटा का इस्तेमाल केवल तय उद्देश्य के लिए ही हो।यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और पहचान सत्यापन के लिए PAN, UAN समेत कई व्यक्तिगत जानकारियां साझा करनी पड़ती हैं। ऐसे में डेटा सुरक्षा को लेकर मजबूत तकनीकी और कानूनी व्यवस्था जरूरी हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बाद अब केंद्र सरकार के सामने चुनौती है कि वह निजी कंपनियों की डेटा पहुंच को नियंत्रित करने के साथ नागरिकों की निजता और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करे।