कंप्यूटर सेंटर खोलना चाहती थीं, बन गईं देश की मिसाल; पुष्पा प्रसाद को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

Knews Desk– बिहार के गोपालगंज की सरकारी शिक्षिका पुष्पा प्रसाद के लिए साल 2026 बेहद खास होने जा रहा है। कभी शिक्षक बनने का सपना न देखने वाली पुष्पा अब देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुनी गई हैं। शिक्षक दिवस के मौके पर 5 सितंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें सम्मानित करेंगी। उनकी कहानी संघर्ष, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल है।

पुष्पा प्रसाद का शुरुआती सपना शिक्षक बनने का नहीं था। उन्होंने कंप्यूटर शिक्षा में डिप्लोमा किया था और आगे चलकर अपना कंप्यूटर सेंटर खोलना चाहती थीं। उनका सपना था कि बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देकर उन्हें नई तकनीक से जोड़ें। हालांकि, उनके पति बाल्मीकि प्रसाद ने उन्हें शिक्षण के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। उनके पति खुद 1999 बैच के बीपीएससी शिक्षक हैं। पति की सलाह के बाद पुष्पा ने टीचिंग को अपना करियर बनाया और धीरे-धीरे इसी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना ली।पुष्पा का बचपन भी सामान्य से अलग रहा। उनके पिता रघुनंदन प्रसाद वायुसेना में कार्यरत थे। इसी वजह से उनके परिवार को अलग-अलग जगहों पर रहना पड़ा। उन्होंने बेंगलुरु के केंद्रीय विद्यालय से कक्षा 9 तक पढ़ाई की। इसके बाद पिता का तबादला हरियाणा के नजफगढ़ हो गया, जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की।

16 मई 2004 को पुष्पा की शादी बाल्मीकि प्रसाद से हुई। शादी के बाद उनके सामने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां भी आईं, लेकिन उन्होंने पढ़ाई और अपने करियर को जारी रखा। साल 2006 में पंचायत नियोजन प्रक्रिया के तहत उनका चयन शिक्षिका के पद पर हुआ। इसके बाद उन्होंने प्राथमिक विद्यालय बलिवन सागर में करीब सात साल तक बच्चों को पढ़ाया।25 मार्च 2013 को उनका तबादला कन्या मध्य विद्यालय, कुचायकोट में हुआ। यहां वह गणित, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषय पढ़ाती हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को निखारने पर भी ध्यान देती हैं। छुट्टियों और खाली समय में वह छात्राओं को पेंटिंग और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ती हैं।पुष्पा प्रसाद के काम को पहले भी कई स्तरों पर पहचान मिल चुकी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा पटना में उन्हें दो बार राजकीय पुरस्कार भी मिल चुका है। अब राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन ने उनके काम को देशभर में पहचान दिलाई है।

पुरस्कार के लिए चयन की खबर जब पुष्पा को मिली तो उन्हें पहले विश्वास ही नहीं हुआ। उन्हें इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली। उनके लिए यह सम्मान सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि गोपालगंज और बिहार के लिए भी गर्व का विषय है।पुष्पा ने दियारा क्षेत्र के एक छोटे गांव के स्कूल में शिक्षा की स्थिति बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया। उनके प्रयासों ने बच्चों को पढ़ाई के साथ दूसरी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने में भी मदद की। यही समर्पण अब उन्हें राष्ट्रीय मंच तक लेकर पहुंचा है।पुष्पा प्रसाद की कहानी बताती है कि करियर की शुरुआत भले ही किसी और सपने से हो, लेकिन अगर मेहनत और लगन के साथ कोई रास्ता चुना जाए तो वही रास्ता बड़ी उपलब्धि तक पहुंचा सकता है। कभी कंप्यूटर सेंटर खोलने का सपना देखने वाली पुष्पा आज देश के शिक्षकों के बीच सम्मानित होने जा रही हैं।

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