मां को बनाया अपना मैनेजर, 2 हफ्ते बाद ही कर दिया फायर! महिला ने बताई हैरान करने वाली वजह

Knews Desk– मां को अक्सर बच्चे का सबसे बड़ा सहारा और शुभचिंतक माना जाता है. लेकिन जब यही मां आपके करियर की मैनेजर बन जाएं, तो क्या होगा? सोशल मीडिया पर एक महिला की कहानी तेजी से चर्चा में है, जिसने अपनी मां को करियर मैनेजर की जिम्मेदारी दी, लेकिन सिर्फ दो हफ्ते बाद ही उन्हें इस पद से हटा दिया. हैरानी की बात यह है कि इसकी वजह मां की लापरवाही नहीं, बल्कि बेटी के लिए उनकी जरूरत से ज्यादा चिंता थी.

यह कहानी अवंती नागराल की है, जिन्होंने लिंक्डइन पर अपने अनुभव के बारे में बताया. उस समय वह हार्वर्ड जाने से पहले गैप ईयर पर थीं और थिएटर तथा म्यूजिक के जरिए अलग-अलग जगहों पर परफॉर्म कर रही थीं. जैसे-जैसे उनका काम बढ़ने लगा, उन्हें महसूस हुआ कि सिर्फ स्टेज पर परफॉर्म करना ही पर्याप्त नहीं है. ईमेल का जवाब देना, फीस तय करना, कार्यक्रमों की व्यवस्था करना, लोगों से संपर्क करना और दूसरे प्रोफेशनल कामों को संभालने के लिए उन्हें एक मैनेजर की जरूरत थी.

ऐसे में उनकी मां ने बेटी की मदद करने की इच्छा जताई. उनके पास समय भी था और बेटी के काम को लेकर वह पूरी तरह समर्पित थीं. इसलिए अवंती ने उन्हें अपना करियर मैनेजर बना लिया. शुरुआत में यह फैसला बिल्कुल सही लगा. आखिर मां से ज्यादा भरोसेमंद व्यक्ति कौन हो सकता है? लेकिन कुछ ही दिनों में दोनों के बीच मां-बेटी और मैनेजर-क्लाइंट की भूमिकाओं का अंतर सामने आने लगा.अवंती के मुताबिक, उनकी मां बेटी के करियर को मैनेज करने के बजाय कई बार उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देने लगीं. कुछ ऐसे कामों के प्रस्ताव आते थे जिनमें देर रात तक शो करना पड़ता था या अनजान शहरों में जाकर परफॉर्म करना होता था. ऐसे मौकों पर उनकी मां को बेटी की सुरक्षा की चिंता सताने लगती थी और वह कई प्रस्तावों को लेकर सहज नहीं थीं. कुछ कामों को लेकर वह उन्हें मना भी कर देती थीं.

यही वजह धीरे-धीरे दोनों की प्रोफेशनल सोच के बीच अंतर पैदा करने लगी. एक मैनेजर के लिए किसी प्रस्ताव को इस आधार पर देखना जरूरी होता है कि वह कलाकार के करियर के लिए कितना फायदेमंद है. वहीं एक मां स्वाभाविक रूप से यह भी देखती है कि उसकी बेटी सुरक्षित रहेगी या नहीं. अवंती के मामले में यही भावनात्मक पहलू उनके प्रोफेशनल फैसलों पर भारी पड़ने लगा.अवंती ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी मां को इसलिए नहीं हटाया क्योंकि वह काम को लेकर गंभीर नहीं थीं. असल समस्या यह थी कि उनकी मां उन्हें लेकर बहुत ज्यादा चिंतित रहती थीं. यानी वह एक अच्छी मां की भूमिका निभा रही थीं, लेकिन एक प्रोफेशनल मैनेजर के तौर पर उनकी प्राथमिकताएं अलग होनी चाहिए थीं.

आखिरकार सिर्फ दो हफ्ते बाद अवंती ने अपनी मां को मैनेजर की जिम्मेदारी से हटा दिया. इसके बाद उन्होंने अपने करियर के लिए प्रोफेशनल मैनेजर, एजेंसियों और अन्य विशेषज्ञों की मदद लेना शुरू किया. उनका अनुभव इस बात की ओर भी इशारा करता है कि करियर की शुरुआत में परिवार पर भरोसा करना आसान होता है, लेकिन जैसे-जैसे काम बढ़ता है, प्रोफेशनल और निजी रिश्तों के बीच स्पष्ट सीमाएं जरूरी हो जाती हैं.इस पूरी कहानी का दिलचस्प पहलू यह है कि मां को नौकरी से हटाने का मतलब उनके रिश्ते में दरार आना नहीं था. दोनों की नीयत अच्छी थी, लेकिन उनकी भूमिकाएं अलग थीं. यह मामला दिखाता है कि किसी करीबी व्यक्ति का आपके लिए बेहद भरोसेमंद होना और उसी व्यक्ति का प्रोफेशनल भूमिका के लिए सही होना, दोनों अलग बातें हो सकती हैं. अवंती की कहानी इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *