चीनी कंपनियों पर टूटा इंपोर्ट का कहर! ड्यूटी फ्री चीनी की मंजूरी से 5% तक लुढ़के शेयर

Knews Desk– चीनी कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार, 21 अगस्त को शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली. सरकार की ओर से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने और बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट को मंजूरी दिए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई. इस खबर का सीधा असर चीनी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा और कई प्रमुख स्टॉक्स 5 फीसदी तक टूट गए.

शुक्रवार के कारोबार में डालमिया भारत शुगर के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे. कंपनी का शेयर करीब 5.47 फीसदी गिरकर 480.30 रुपये पर आ गया. इसके अलावा द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज में 4.32 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और शेयर 52.99 रुपये पर पहुंच गया. बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर 4.15 फीसदी गिरकर 735.25 रुपये और त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज के शेयर 3.82 फीसदी टूटकर 288.60 रुपये पर आ गए.इसके अलावा उत्तम शुगर मिल्स में 3.07 फीसदी, ईआईडी पैरी में 2.22 फीसदी और धामपुर शुगर मिल्स में 1.99 फीसदी की गिरावट आई. अवध शुगर एंड एनर्जी के शेयर 1.53 फीसदी और बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयर 1.41 फीसदी नीचे रहे. श्री रेणुका शुगर्स में भी करीब 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. सिंभौली शुगर्स का शेयर हालांकि लगभग स्थिर रहा.

दरअसल, सरकार ने गुरुवार को 31 अक्टूबर तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है. सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी कीमतों को नियंत्रित करना है. भारत आम तौर पर चीनी के आयात पर करीब 100 फीसदी ड्यूटी लगाता है. ऐसे में करीब एक दशक बाद बड़े स्तर पर ड्यूटी फ्री चीनी आयात की अनुमति को बाजार के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है.चीनी की कीमतों में हाल के महीनों में तेजी देखने को मिली है. कम उत्पादन के कारण पिछले दो महीनों में घरेलू चीनी कीमतों में करीब 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी की बात सामने आई है. सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब त्योहारों का सीजन नजदीक है. त्योहारों के दौरान मिठाइयों, कन्फेक्शनरी और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में सरकार अतिरिक्त आयात के जरिए बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना चाहती है.

इस फैसले के तहत बंदरगाहों पर मौजूद चीनी रिफाइनरियां कच्ची चीनी के आयात के लिए आवेदन कर सकती हैं. इन रिफाइनरियों को अक्टूबर के अंत तक आयातित कच्ची चीनी से तैयार रिफाइंड चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति भी दी जाएगी.सरकार ने हाल ही में बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने के नियम भी सख्त किए हैं. महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी की खपत करने वाले डीलरों को 15 दिन की खपत के बराबर ही स्टॉक रखने का निर्देश दिया गया है. यह व्यवस्था 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी.

ड्यूटी फ्री इंपोर्ट से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने और कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है. हालांकि, इसका असर चीनी उत्पादकों की कमाई पर पड़ सकता है, क्योंकि ऊंची कीमतों से मिलने वाला फायदा कम हो सकता है. यही वजह है कि निवेशकों ने चीनी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी.दिलचस्प बात यह है कि भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर उल्टा पड़ा. भारत के आयात बाजार में लौटने की खबर के बाद लंदन व्हाइट शुगर और न्यूयॉर्क रॉ शुगर फ्यूचर्स में करीब 4 फीसदी तक तेजी देखी गई. इससे साफ है कि घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया सरकार का कदम भारतीय चीनी कंपनियों के लिए दबाव बढ़ाने वाला है, लेकिन वैश्विक बाजार में चीनी की मांग को बढ़ावा दे सकता है.

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