Knews Desk– ईरान के साथ जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने तेल टैंकरों की आवाजाही के लिए एक गुप्त समुद्री कॉरिडोर तैयार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना की निगरानी में हर रात दर्जनों तेल टैंकर इस बेहद संवेदनशील जलमार्ग से गुजर रहे हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान और अमेरिका दोनों ही होर्मुज पर अपने प्रभाव का दावा कर रहे हैं और सामान्य जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन के तहत हर रात करीब 15 से 20 टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी चैनल से गुजर रहे हैं। यह रास्ता ओमान के तट के करीब है। अमेरिकी सेना इन जहाजों की आवाजाही को निर्धारित समय और समूहों में संचालित कर रही है, ताकि युद्ध के बीच जहाजों को अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से खाड़ी क्षेत्र में पहुंचाया जा सके।
इस ऑपरेशन की खास बात यह है कि अमेरिका सिर्फ तेल से भरे टैंकरों को बाहर निकालने में मदद नहीं कर रहा, बल्कि खाली टैंकरों को भी अरब सागर से होर्मुज के रास्ते खाड़ी के बंदरगाहों तक पहुंचाया जा रहा है। वहां ये जहाज तेल लोड करने के बाद फिर अमेरिकी सैन्य निगरानी में इसी समुद्री मार्ग से बाहर निकल रहे हैं। इस पूरी व्यवस्था को अमेरिका में मौजूद एक टास्क फोर्स और क्षेत्रीय खाड़ी देशों के सहयोग से संचालित किए जाने की बात सामने आई है।बताया जा रहा है कि इस गुप्त कॉरिडोर के जरिए रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रहा है। हालांकि, यह मात्रा युद्ध से पहले होर्मुज के जरिए होने वाले तेल परिवहन की तुलना में करीब आधी है। इसके बावजूद मौजूदा परिस्थितियों में यह वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। युद्ध से पहले दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल और LNG कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। लेकिन ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद यहां जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। 19 अगस्त को उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एक दिन में सिर्फ छह कमोडिटी जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया, जबकि युद्ध से पहले यह संख्या करीब 130 से 140 जहाज प्रतिदिन थी।
अमेरिका की यह रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होर्मुज को लेकर दावे बिल्कुल अलग हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि जलडमरूमध्य खुला है और अमेरिका का उस पर नियंत्रण है, जबकि ईरान का कहना है कि वहां जहाजों की आवाजाही अभी भी सामान्य नहीं है। इसी विरोधाभास के बीच कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं।अमेरिका ने हाल के सैन्य अभियानों में ईरान की रडार और समुद्री निगरानी क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। इसके बाद अमेरिकी सेना को दक्षिणी चैनल से जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिली है। हालांकि, यह रास्ता पूरी तरह जोखिममुक्त नहीं है। हाल के दिनों में होर्मुज के आसपास जहाजों पर हमलों और मिसाइल घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।
दरअसल, अमेरिका का यह कदम ईरान की उस रणनीति की याद दिलाता है जिसमें बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में समुद्री यातायात को नियंत्रित तरीके से संचालित करने की कोशिश की जाती है। फर्क इतना है कि अब अमेरिका अपनी सैन्य ताकत और निगरानी तंत्र के जरिए तेल की सप्लाई को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इसका सीधा मकसद वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई की कमी और कीमतों में तेज उछाल को रोकना है।हालांकि, इस ऑपरेशन के बावजूद होर्मुज की स्थिति अभी सामान्य नहीं हुई है। जहाजों की संख्या युद्ध-पूर्व स्तर से काफी नीचे है और कई कंपनियां सुरक्षा कारणों से इस मार्ग से दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में अमेरिकी गुप्त कॉरिडोर से कुछ हद तक तेल की सप्लाई जरूर बहाल हुई है, लेकिन यह अभी यह साबित नहीं करता कि होर्मुज संकट पूरी तरह खत्म हो चुका है