राजनीति ने पकड़ा तूल,सड़कों पर गड्डे फुल ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में मानसून की बारिश लगातार अपना असर दिखा रही है। पहाड़ से लेकर मैदान तक भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन के चलते कई सड़क मार्ग बाधित हैं, तो मैदानी इलाकों में भी स्थिति ठीक नहीं है.और आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन रही हैं। हालात ये हैं कि बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने के बाद वाहन चालकों को सड़क और गड्ढे के बीच फर्क करना मुश्किल हो रहा है.कई जगह दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। हालांकि सरकार का दावा है. कि मरम्मत का कार्य तेज़ी से चल रहा है। वही मामला अब सिर्फ जनता की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि सियासी मुद्दा भी बन चुका है। रुद्रप्रयाग में भाजपा के पूर्व सह मीडिया प्रभारी कमलेश उनियाल ने अपनी ही सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े करते हुए अपने ही कैबिनेट मंत्री और विधायक भरत सिंह चौधरी पर सड़कों की बदहाली और विकास कार्यों में लापरवाही के आरोप लगाए हैं, इतना ही नहीं उन्होंने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भी लिखा है। सत्ता पक्ष के भीतर से उठे इन सवालों ने सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष ने भी मौके को हाथों हाथ लेते हुए सरकार पर हमला बोला है। विपक्षी दलों का आरोप है, कि सरकार सड़को व अन्य विकास के बड़े बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग दिखाई देती है।आपने कार्यकर्मो में विधायकों के लिए भरी बारिश में लाल कॉरपेट स्वगत में बिछाए जाते है. और जनता सड़को पर बड़े गड्डो में गिर रही है.जिसके चलते अब राजनीति में भी आपसी आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला देखने को मिल रहा है.

मौसम विज्ञान केंद्र ने 21 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश इलाकों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इसका असर पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक देखा जा रहा है।लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। साथ ही भूस्खलन की वजह से कई सड़क मार्ग बाधित हो रहे हैं। यह समस्या सबसे ज्यादा पर्वतीय जिलों में है। वहीं मैदानी इलाकों में सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और जगह जगह गड्ढे होना गंभीर समस्या बन गई है। बारिश के पानी में गड्ढे नजर न आने से राहगीरों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े भी डराने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक 1 जनवरी से 16 अगस्त के बीच सड़क हादसों में 235 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 854 लोग घायल और 9 लोग लापता हैं। इसी बीच भाजपा के अपने ही नेता सरकार के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों ने भी बदहाल सड़क व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर धामी सरकार पर हमला बोला है।

      

कुल मिलाकर,उत्तराखंड में मानसून ने जहां एक तरफ प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ा दिया है,वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की लापरवाही को भी सामने लाकर खड़ा कर दिया है। सड़कों के गड्ढे, बंद रास्ते और दुर्घटनाओं का खतरा हर रोज आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है, कि अब सरकार के अंदर से ही बागवत की आवाजें उठने लगी हैं। रुद्रप्रयाग से भाजपा नेता कमलेश उनियाल का PMO को पत्र लिखना इस बात का संकेत है. कि जमीनी स्तर पर विकास के काम धीमे पड़े हैं। इधर विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। कांग्रेस का आरोप है, कि सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही है,लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हो रहा। ऐसे में सवाल यह है, कि क्या सरकार समय रहते सड़कों की मरम्मत और जरूरी इंतजाम कर पाएगी या फिर बारिश खत्म होने के बाद भी जनता इसी तरह गड्ढों और बंद सड़कों से जूझती रहेगी यह देखने वाली बात होगी।

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