KNEWS DESK- राम मंदिर चढ़ावा और ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने सीलबंद लिफाफे में पेश की गई SIT की स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग खारिज कर दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और अन्य पक्षों को जांच से जुड़े सुझाव देने की अनुमति दी है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सभी पक्ष अपने सुझाव दें। इन सुझावों पर विचार किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें विशेष जांच दल यानी SIT को भेजा जाएगा। अदालत ने कहा कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन पहलुओं की गहन जांच की आवश्यकता है, उन्हें जांच के दायरे में शामिल किया जाए।
सीलबंद लिफाफे में पेश हुई SIT रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान SIT ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने सीलबंद लिफाफे में पेश की। याचिकाकर्ताओं की ओर से रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने और उसे सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया। CJI ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक करने के बजाय सभी पक्ष उन बिंदुओं और पहलुओं के बारे में अपने सुझाव दें, जिनकी जांच की जरूरत महसूस होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सॉलिसिटर जनरल का कार्यालय पक्षकारों से मिले सुझावों को SIT तक पहुंचाएगा। अदालत ने भरोसा जताया कि SIT इन सुझावों पर निष्पक्ष तरीके से विचार करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया है। इस SIT में संबंधित अधिकारियों के अलावा एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया है।
अदालत ने कहा कि वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की जांच में फोरेंसिक ऑडिट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। SIT को मामले के उन सभी पहलुओं की जांच करनी है, जिनसे ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सके। इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने SIT के गठन को मंजूरी दी थी। अदालत ने जांच एजेंसी को तय समयसीमा में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। साथ ही SIT में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने को भी कहा गया था। अब सोमवार की सुनवाई में अदालत ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने से इनकार करते हुए जांच को और प्रभावी बनाने के लिए सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं।
याचिकाओं में क्या-क्या मांग?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच CBI से कराने, ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का CAG और फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की है। इसके अलावा ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जांच पूरी होने तक बड़े वित्तीय फैसलों पर रोक लगाने जैसी मांगें भी अदालत के सामने रखी गई हैं।
मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने SIT रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार करते हुए जांच के लिए सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं।