KNEWS DESK- दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया है। इस मामले में पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए माफी की मांग की है। वहीं राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने भी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखा है।
सुमित्रो चटर्जी ने कथित तौर पर कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की कोशिश पर नाराजगी जताई। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह देशभक्ति और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के सम्मान से जुड़ा विषय है।
शुभेंदु अधिकारी ने कांग्रेस से मांगी माफी
शुभेंदु अधिकारी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम् पिछले करीब 150 वर्षों से देश के राष्ट्रीय आंदोलन और देशभक्ति की भावना से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् का अपमान देशभक्ति और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान का अपमान है। उन्होंने बंगाल की धरती से इस घटना की कड़ी निंदा की और कांग्रेस से माफी मांगने की बात कही।
अधिकारी ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेताओं से उन्हें विरोध की उम्मीद नहीं है, लेकिन वह सोनिया गांधी की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप
शुभेंदु अधिकारी ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस नेताओं को वंदे मातरम् को लेकर आपत्ति क्यों है।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को केवल एक राजनीतिक विवाद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसका संबंध देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रवादी इतिहास से है। अधिकारी ने दावा किया कि इस घटना को लेकर बंगाल में लोगों के बीच नाराजगी है।
बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र
विवाद के बीच बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। सुमित्रो चटर्जी ने कथित तौर पर वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की कोशिश को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर एक आम नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के सीधे वंशज के तौर पर अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने घटना पर दुख, गुस्सा और निराशा जाहिर करते हुए इसे ऐतिहासिक गलती की पुनरावृत्ति बताया।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है वंदे मातरम्
वंदे मातरम् का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् का गायन किया था। इसके बाद 1905 में बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधुरानी ने भी इसका गायन किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् देशवासियों के बीच राष्ट्रवादी भावना और संघर्ष की प्रेरणा का प्रतीक बन गया था।
सुमित्रो चटर्जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् की भूमिका का जिक्र करते हुए खुदीराम बोस जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने श्री अरबिंदो के विचारों का उल्लेख करते हुए वंदे मातरम् को देशभक्ति की भावना से जोड़ने की बात कही।
बंगाल तक पहुंचा राजनीतिक विवाद
कांग्रेस मुख्यालय में हुए घटनाक्रम के बाद अब यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बन गया है। एक तरफ शुभेंदु अधिकारी कांग्रेस से माफी की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज ने भी इस मामले पर सवाल उठाए हैं।
वंदे मातरम् के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन से इसके जुड़ाव को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में और गरमाने के आसार हैं।