Knews Desk- महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की गई। सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके ने 15 अगस्त को जिला परिषद स्कूल परिसर में रंगोली बनाकर इस अभियान की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने स्कूल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया और अभियान में सहयोग के लिए गांव के सरपंच का आभार जताया।
अभिजीत दीपके ने कहा कि सरपंच ने आठ दिनों के भीतर स्कूल में जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना होनी चाहिए। शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। इन कामों के लिए बेरोजगार युवाओं को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
अभिजीत दीपके ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देश में करीब 94 हजार स्कूल बंद हो चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी कई सरकारी स्कूलों में बिजली, पानी, शौचालय और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और स्थानीय स्तर पर उनकी कमियों को दूर करने के लिए लोगों को प्रेरित करना है।
गांव वाले और अभिभावक भी बताएंगे स्कूलों की कमियां
इस अभियान के तहत सरपंच और ग्रामीण स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। स्कूल में मौजूद कमियों को दर्ज किया जाएगा और सुधार से पहले और बाद की तस्वीरें साझा की जाएंगी, ताकि दूसरे गांव भी इससे सीख सकें।
अभिभावकों और ग्रामीणों को भी स्कूलों की समस्याओं की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए सीजेपी की ओर से सोशल मीडिया पर एक आसान फॉर्म उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसके जरिए लोग स्कूलों में मौजूद कमियों की जानकारी साझा कर सकेंगे।
इन सुविधाओं पर रहेगा मुख्य फोकस
अभियान के दौरान सरकारी स्कूलों में बिजली, स्वच्छ पेयजल, लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग बेहतर शौचालय और गुणवत्तापूर्ण मिड-डे मील जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अभिजीत दीपके का कहना है कि किसी गांव के बच्चे को सिर्फ स्कूल की खराब व्यवस्था के कारण बेहतर शिक्षा और अच्छे माहौल से वंचित नहीं होना चाहिए। अभियान के जरिए देशभर के लोगों को सरकारी स्कूलों की निगरानी और उनके सुधार से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत संतुक पिंपरी से हुई है, लेकिन इसका लक्ष्य देश के सरकारी स्कूलों तक पहुंच बनाना और स्थानीय लोगों की भागीदारी से उनकी बुनियादी व्यवस्थाओं में सुधार लाना है।