Knews Desk– उम्र को महज एक आंकड़ा मानकर अपने सपने को पूरा करने की मिसाल तमिलनाडु के 51 वर्षीय ए. सुरेश कुमार ने पेश की है। दो PhD और MBA जैसी उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी उन्होंने डॉक्टर बनने का अपना वर्षों पुराना सपना नहीं छोड़ा। नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने NEET UG की तैयारी की और परीक्षा पास कर ली। अब उन्हें नागपट्टिनम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS में दाखिला मिला है। खास बात यह है कि उन्होंने NEET में 720 में से 192 अंक हासिल किए हैं। सड़क हादसे के बाद दिव्यांगता की श्रेणी में आने के कारण उन्हें विशेष कोटे के तहत मेडिकल सीट मिली है।
सुरेश कुमार ने साल 1992 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। उस समय उनका सपना मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वह MBBS की पढ़ाई नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने फार्मेसी के क्षेत्र से करियर की शुरुआत की और आगे BBA, MBA के साथ दो PhD की डिग्रियां हासिल कीं। पढ़ाई के साथ उन्होंने डायग्नोस्टिक्स सेक्टर में वरिष्ठ पद पर काम किया। हालांकि, डॉक्टर बनने की इच्छा उनके मन में हमेशा बनी रही।
जब NEET UG में ऊपरी आयु सीमा हटाई गई तो सुरेश कुमार ने अपने अधूरे सपने को फिर से पूरा करने का फैसला किया। उन्होंने फुल टाइम नौकरी के साथ NEET की तैयारी शुरू की। दिनभर काम करने के बाद वह रात करीब 10 बजे से 12 बजे तक पढ़ाई करते थे। वह अपने बेटे को बायोलॉजी पढ़ाते थे और इसी दौरान खुद भी विषय की तैयारी करते रहे। उनकी पत्नी ने भी उनके इस सफर में पूरा सहयोग किया।
मेहनत के बाद सुरेश कुमार ने NEET UG में 720 में से 192 अंक हासिल किए। सड़क हादसे के कारण दिव्यांगता की श्रेणी में आने के चलते उन्हें विशेष कोटे के तहत नागपट्टिनम सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट मिली। अब वह अपने से काफी कम उम्र के विद्यार्थियों के साथ मेडिकल की पढ़ाई करेंगे। उनके लिए यह सिर्फ एक डिग्री हासिल करने का मौका नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सपने को पूरा करने की शुरुआत है।
MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुरेश कुमार जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहते हैं। उनकी इच्छा दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की भी है। उनकी कहानी बताती है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उम्र बाधा नहीं होती। अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत जारी रहे तो वर्षों पुराना सपना भी पूरा किया जा सकता है। 51 साल की उम्र में MBBS की पढ़ाई शुरू करने जा रहे सुरेश कुमार ने उन लोगों के लिए भी प्रेरणा पेश की है, जो किसी वजह से अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं।