Knews Desk- केंद्र सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के खिलाफ अत्याचार के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाली राहत राशि बढ़ाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मौजूदा मुआवजा राशि में 40 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके तहत न्यूनतम राहत 85 हजार रुपये से बढ़कर करीब 1 लाख रुपये और अधिकतम राशि 8.25 लाख से बढ़कर करीब 12 लाख रुपये हो सकती है।
SC/ST अत्याचार निवारण नियमों के तहत राहत राशि आखिरी बार 2016 में संशोधित की गई थी। इसके बाद महंगाई और जीवन-यापन की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। इसी को देखते हुए सरकार अब मुआवजे की रकम को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ाने पर विचार कर रही है।
प्रस्ताव में राहत राशि को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) से जोड़ने की बात भी सामने आई है, ताकि भविष्य में महंगाई के हिसाब से मुआवजे में बदलाव किया जा सके।
गंभीर अपराधों में मिलती है ज्यादा राहत
मुआवजे की रकम अपराध की प्रकृति और उसकी गंभीरता के आधार पर तय होती है। फिलहाल अलग-अलग मामलों में 85 हजार रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक की राहत का प्रावधान है।
रेप के मामलों में 5 लाख रुपये तक और गैंगरेप के मामलों में 8.25 लाख रुपये तक की राहत दी जा सकती है। वहीं एसिड अटैक जैसे मामलों में पीड़ित को लगी चोट की गंभीरता के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाता है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इन सभी श्रेणियों में राहत राशि बढ़ सकती है।
SC/ST अत्याचार के मामलों में राहत राशि को कानूनी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से जोड़ा गया है। FIR दर्ज होने के बाद कुल राहत का 25 फीसदी हिस्सा दिया जाता है। इसके बाद पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल होने पर 50 फीसदी राशि जारी की जाती है। बाकी 25 फीसदी राशि आरोपी के दोषी ठहराए जाने के बाद दी जाती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि पीड़ित परिवार को केस की शुरुआत से ही आर्थिक सहायता मिल सके और मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान भी मदद जारी रहे।
सिर्फ मुआवजा बढ़ाना पर्याप्त नहीं
पीड़ितों को अधिक आर्थिक सहायता देना महत्वपूर्ण है, लेकिन SC/ST अत्याचार के मामलों में सिर्फ मुआवजे की राशि बढ़ाने से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। FIR दर्ज होने, जांच पूरी करने, चार्जशीट दाखिल करने और मुकदमे की सुनवाई में तेजी भी जरूरी है।
सरकार विशेष पुलिस स्टेशनों और विशेष अदालतों की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों को ऐसे विशेष पुलिस स्टेशन स्थापित करने के लिए एकमुश्त 5 लाख रुपये की सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके बाद का खर्च राज्य सरकारों को उठाना होगा।
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 181 विशेष पुलिस स्टेशन फिलहाल संचालित हैं, लेकिन ये केवल सात राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में हैं। ऐसे में अधिक मामलों वाले राज्यों में जांच और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करना बड़ी चुनौती है।
पिछले वर्षों में कितनी राहत दी गई?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक SC/ST अत्याचार के पीड़ितों को राहत देने के लिए पिछले वर्षों में लगातार धनराशि जारी की गई है।
- 2019-20: 141.36 करोड़ रुपये, 23,866 पीड़ित लाभान्वित
- 2020-21: 113.03 करोड़ रुपये, 23,592 पीड़ित लाभान्वित
- 2021-22: 126.72 करोड़ रुपये, 20,278 पीड़ित लाभान्वित
- 2022-23: 91.54 करोड़ रुपये, 23,828 पीड़ित लाभान्वित
- 2023-24: 97.95 करोड़ रुपये, 19,240 पीड़ित लाभान्वित
- 2024-25: 89.49 करोड़ रुपये, 20,074 पीड़ित लाभान्वित
- 2025-26: 87.08 करोड़ रुपये जारी, अब तक 12,665 पीड़ितों को राहत
पीड़ितों के सामने आर्थिक के साथ सामाजिक चुनौतियां भी
SC/ST अत्याचार के मामलों में प्रभावित परिवारों को सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं झेलना पड़ता। कई मामलों में उन्हें सामाजिक दबाव, धमकी, रोजगार से जुड़े नुकसान और संपत्ति संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
इसी वजह से कानून में पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को भी महत्व दिया गया है। ऐसे में प्रस्तावित मुआवजा बढ़ोतरी के साथ अगर जांच और न्याय की प्रक्रिया को भी तेज किया जाता है, तभी पीड़ितों को वास्तविक और समय पर राहत मिल सकेगी।
फिलहाल मुआवजे में बढ़ोतरी का प्रस्ताव विचाराधीन है। अंतिम फैसला होने के बाद ही नई राहत राशि और उसके लागू होने की तस्वीर साफ होगी।