KNEWS DESK – केरल में भारी बारिश ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 31 जुलाई की रात से 1 अगस्त तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और जलभराव जैसी घटनाएं सामने आई हैं। बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि आठ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। 13 लोग घायल हुए हैं।
पहाड़ी इलाकों में बारिश का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है। कई जगह मकानों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है। नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है। हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
5792 लोगों को राहत कैंपों में पहुंचाया गया
केरल मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, राज्यभर में अब तक 5,792 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रभावित लोगों के लिए कुल 209 राहत कैंप बनाए गए हैं।
बारिश और इससे जुड़ी आपदाओं के कारण 27 मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं, जबकि 196 घरों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है।
सरकार ने कहा है कि जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही जिन लोगों के घर और रोजगार बारिश के कारण प्रभावित हुए हैं, उन्हें भी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा
लगातार हो रही बारिश के कारण केरल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। कई क्षेत्रों में मिट्टी और मलबा खिसकने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके चलते प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
यह स्थिति वायनाड में टनल निर्माण स्थल पर करीब एक महीने पहले हुए हादसे के बाद सामने आई है। उस घटना में भारी बारिश के कारण मलबा खिसकने से आठ लोगों की जान चली गई थी।
मौजूदा हालात को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।
बारिश से कब मिलेगी राहत?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, रविवार से केरल में बारिश की तीव्रता कम होने की संभावना है।
तिरुवनंतपुरम और कोल्लम जैसे दक्षिणी जिलों में स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है, क्योंकि बारिश वाले बादलों का क्षेत्र उत्तर की तरफ बढ़ रहा है।
हालांकि, बारिश कम होने के बावजूद त्रिशूर के उत्तर में स्थित जिलों में बाढ़ का खतरा फिलहाल पूरी तरह टला नहीं है। पिछले दो दिनों में हुई भारी बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है।
ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी-नालों तथा भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में कैंप करेंगे मंत्री
राज्य में बारिश से पैदा हुए हालात को देखते हुए सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों से संपर्क कर स्थिति की समीक्षा की है।
सरकार ने मंत्रियों को सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में मौजूद रहने और राहत एवं बचाव कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री की ओर से मंत्रियों और जिला कलेक्टरों के साथ बारिश और बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया।
आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार तैयार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है और आपदा प्रबंधन नेटवर्क को अलर्ट पर रखा गया है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना और राहत कैंपों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मौसम विभाग की ओर से बारिश की तीव्रता में कमी आने का अनुमान राहत देने वाला है, लेकिन कई इलाकों में नदियां उफान पर होने और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन अभी भी पूरी तरह सतर्क है।