‘जीवन में कभी नहीं होगी गलती…’, अमित शाह ने युवाओं से क्यों की ‘गीता रहस्य’ पढ़ने की अपील?

KNEWS DESK – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (1 अगस्त) को पुणे में आयोजित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में युवाओं से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रसिद्ध पुस्तक ‘श्रीमद्भगवद्गीता रहस्य’ पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि तिलक के दृष्टिकोण से गीता की शिक्षाओं को समझने और जीवन में उतारने से युवाओं को सही दिशा मिलेगी। समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने लोकमान्य तिलक के विचारों, स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उनकी अवधारणा का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के क्षेत्र में अजीत डोभाल के योगदान की भी सराहना की।

‘तिलक के नजरिए से गीता पढ़ें युवा’

अमित शाह ने युवाओं से कहा कि उन्हें भगवद गीता को लोकमान्य तिलक के दृष्टिकोण से पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं सभी युवाओं से अपील करता हूं कि वे गीता को तिलक महाराज के दृष्टिकोण से पढ़ें। आप अपने जीवन में कभी कोई गलती नहीं करेंगे।”

शाह के मुताबिक, लोकमान्य तिलक ने अपनी पुस्तक ‘श्रीमद्भगवद्गीता रहस्य’ में गीता के सिद्धांतों को व्यावहारिक जीवन से जोड़कर समझाया है। उन्होंने बताया कि किस तरह एक आम नागरिक, छात्र या युवा इन सिद्धांतों को अपने रोजमर्रा के जीवन में अपना सकता है।

गृह मंत्री ने कहा कि लोकमान्य तिलक की रचनाएं समय के साथ कभी अप्रासंगिक नहीं होंगी। उनके विचार शाश्वत हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

सार्वजनिक गणेश उत्सव के जरिए लोगों को किया एकजुट

अमित शाह ने स्वतंत्रता आंदोलन में लोकमान्य तिलक की भूमिका को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सार्वजनिक गणेश उत्सव को लोगों को एकजुट करने और स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का माध्यम बनाया। तिलक का जीवन और उनकी शिक्षाएं आज भी देश के युवाओं को प्रेरणा देती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की ओर से दिखाए गए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा को अब कोई उलट नहीं सकता।

‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार…’ ने बदली आंदोलन की दिशा

गृह मंत्री ने लोकमान्य तिलक को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख वास्तुकारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद, स्वराज और सामाजिक जागरण को लेकर तिलक के विचारों ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी।

शाह ने तिलक के प्रसिद्ध नारे ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ का जिक्र करते हुए कहा कि इसने स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। इस नारे ने लोगों के भीतर यह भावना पैदा की कि स्वशासन उनका अधिकार है, किसी की ओर से दिया गया एहसान नहीं।

उनके मुताबिक, तिलक के राष्ट्रवाद, स्वराज और सामाजिक जागरण से जुड़े विचार आज भी देश के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं।

अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026

समारोह के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया। अमित शाह ने डोभाल के योगदान की सराहना करते हुए लोकमान्य तिलक की निर्भीक राष्ट्रवादी सोच और अजीत डोभाल की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के बीच समानता का जिक्र किया।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में सरकार बनने के बाद अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर विदेश नीति तक कई क्षेत्रों में भारत ने मजबूत और निर्णायक रुख अपनाया।

‘भारत की विदेश नीति को मिली स्टील जैसी मजबूती’

अमित शाह ने कहा कि एक समय भारत की विदेश नीति में अपेक्षित दृढ़ता की कमी दिखाई देती थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और अजीत डोभाल की रणनीतिक भूमिका के कारण इसमें बड़ा बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि आज भारत की विदेश नीति की रीढ़ “स्टील जैसी मजबूत” हो गई है और वैश्विक स्तर पर देश का सम्मान और प्रभाव दोनों बढ़े हैं।

गृह मंत्री ने लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान केवल औपचारिकता या दिखावे के लिए नहीं होते, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।

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