Ajit Doval: अजीत डोभाल को मिला लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार, अमित शाह ने किया सम्मानित

KNEWS DESK- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। शनिवार को पुणे में आयोजित समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। तिलक स्मारक ट्रस्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक किए गए उनके उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए उन्हें इस वर्ष पुरस्कार के लिए चुना।

अजीत डोभाल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील मामलों में उनके अनुभव और रणनीतिक भूमिका को अहम माना जाता है।

अजीत डोभाल को क्यों मिला लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार?

तिलक स्मारक ट्रस्ट के मुताबिक, अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस सम्मान से नवाजा गया है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने देश के कई संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

81 वर्षीय अजीत डोभाल ने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाली हैं। इन इलाकों में सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के बीच उनके अनुभव ने उन्हें देश के प्रमुख रणनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों में शामिल किया। इसके अलावा डोभाल ने विदेश में भी भारत के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में राजनयिक भूमिका निभा चुके हैं। सुरक्षा और कूटनीति दोनों क्षेत्रों में लंबे अनुभव के कारण केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले NSA

अजीत डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में वह प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति से जुड़े रणनीतिक विषयों और अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर सलाह देते हैं।

डोभाल भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर होने वाली वार्ताओं में भारत के विशेष प्रतिनिधि की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। भारत-चीन सीमा से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। डोकलाम में भारत और चीन के बीच पैदा हुए गतिरोध के दौरान हुए कूटनीतिक प्रयासों में भी डोभाल की अहम भूमिका मानी जाती है। उनके लंबे अनुभव और सुरक्षा मामलों की समझ को देखते हुए तिलक स्मारक ट्रस्ट ने उन्हें इस वर्ष के लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना।

1983 में हुई थी पुरस्कार की शुरुआत

लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1983 में तिलक स्मारक ट्रस्ट ने की थी। यह सम्मान स्वतंत्रता सेनानी और महान राष्ट्रवादी नेता बाल गंगाधर तिलक की स्मृति में दिया जाता है।

हर साल 1 अगस्त, यानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। ऐसे व्यक्ति को सम्मान के लिए चुना जाता है, जिसने देश की प्रगति, विकास और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। पहली बार यह सम्मान समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को दिया गया था। इसके बाद राजनीति, सामाजिक सेवा और सार्वजनिक जीवन समेत अलग-अलग क्षेत्रों की कई बड़ी हस्तियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

पीएम मोदी समेत इन दिग्गजों को मिल चुका है सम्मान

लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वालों की सूची में देश की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और वरिष्ठ नेता शरद पवार समेत कई प्रतिष्ठित हस्तियों को यह सम्मान मिल चुका है। अब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम भी इस सूची में शामिल हो गया है। पुणे में आयोजित समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें पुरस्कार प्रदान किया। यह सम्मान राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक मामलों और देश की सेवा में उनके लंबे योगदान को मान्यता देने के रूप में देखा जा रहा है।

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