Knews Desk- देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार जितनी तेजी से हो रहा है, उतनी ही तेजी से टोल कलेक्शन भी बढ़ रहा है। संसद में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में FASTag के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक का टोल एकत्र किया गया है। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन करीब ₹171 करोड़, हर घंटे लगभग ₹7.14 करोड़ और हर मिनट करीब ₹11.9 लाख का टोल संग्रह हुआ।
वित्त वर्ष 2024-25 में सबसे अधिक टोल कलेक्शन वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर रहा। इसके बाद राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु का नंबर रहा।
- उत्तर प्रदेश – ₹6,573.82 करोड़
- राजस्थान – ₹6,289.22 करोड़
- महाराष्ट्र – ₹6,102.80 करोड़
- गुजरात – ₹5,450.20 करोड़
- तमिलनाडु – ₹4,459.40 करोड़
- कर्नाटक – ₹4,320.27 करोड़
- मध्य प्रदेश – ₹4,188.15 करोड़
- बिहार – ₹2,036.94 करोड़
सबसे कम टोल वसूली वाले राज्य
- हिमाचल प्रदेश – ₹171 करोड़
- जम्मू-कश्मीर – ₹507.56 करोड़
- असम – ₹547.56 करोड़
- केरल – ₹579.22 करोड़
- उत्तराखंड – ₹581.73 करोड़
- झारखंड – ₹894.55 करोड़
क्या राज्यों को टोल का हिस्सा मिलता है?
राष्ट्रीय राजमार्गों से मिलने वाला टोल सीधे केंद्र सरकार के समेकित कोष (Consolidated Fund of India) में जमा होता है। इसके बाद बजटीय प्रक्रिया के तहत इस राशि का उपयोग देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण, विस्तार और रखरखाव पर किया जाता है। फिलहाल किसी राज्य को टोल राजस्व का अलग हिस्सा देने की कोई व्यवस्था नहीं है।
केरल सरकार ने पहले यह मांग उठाई थी कि राज्य द्वारा हाईवे परियोजनाओं में किए गए निवेश को देखते हुए उसे टोल से हिस्सा मिलना चाहिए। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई नीति लागू नहीं है। सरकार ने यह जरूर माना कि केरल में भूमि अधिग्रहण की लागत लगभग ₹23,350 करोड़ रही, जिससे कई परियोजनाओं को गति मिली।
FASTag से हर साल बढ़ रही आय
मंत्रालय के अनुसार FASTag के जरिए टोल संग्रह में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- 2023-24 – ₹55,882.12 करोड़
- 2024-25 – ₹61,408.15 करोड़
- 2025-26 – ₹70,278.18 करोड़
सरकार का कहना है कि 16 फरवरी 2021 से राष्ट्रीय राजमार्गों के सभी टोल प्लाजा FASTag आधारित हो चुके हैं। इससे पहले जहां मैनुअल टोल पर वाहन को औसतन 12 मिनट से अधिक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम के कारण औसत समय घटकर करीब 40 सेकंड रह गया है। इससे ट्रैफिक जाम और ईंधन की खपत में भी कमी आई है, हालांकि कई टोल प्लाजाओं पर अभी भी लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।
सरकार अब मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक लागू कर रही है। इसमें AI आधारित कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) और FASTag मिलकर बिना वाहन रोके टोल काटेंगे। अभी 17 टोल प्लाजाओं पर इस प्रणाली का परीक्षण शुरू हो चुका है, जिनमें से 5 पूरी तरह संचालित हैं। इसके अलावा 104 और टोल प्लाजाओं को इस तकनीक के लिए चुना गया है।
टोल नियमों में हुए बदलाव
वाहन चालकों को राहत देने के लिए सरकार ने कुछ अहम संशोधन भी किए हैं।
- गैर-व्यावसायिक कार, जीप और वैन के लिए ₹3,000 का वार्षिक पास।
- एक वर्ष या अधिकतम 200 यात्राओं तक पास मान्य।
- बिना FASTag वाले वाहनों के लिए UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क को दो गुना से घटाकर 1.25 गुना किया गया।