सिर्फ नंबर छिपाने से नहीं बनेगी बात! UPI पर प्राइवेसी बढ़ाने के लिए NPCI ला रहा बड़े बदलाव

KNEWS DESK- भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI को अब पहले से ज्यादा सुरक्षित और प्राइवेसी-फ्रेंडली बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के अनुरूप UPI ऐप्स और बैंकों के साथ मिलकर नए बदलावों पर काम कर रहा है। हालांकि मोबाइल नंबर मास्क करना इस दिशा में पहला कदम है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ इससे यूजर्स की प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी।

UPI ट्रांजैक्शन में मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पहचान और वेरिफिकेशन के लिए किया जाता है। यही सुविधा कई बार प्राइवेसी की चिंता भी बन जाती है। खासकर महिला यूजर्स की ओर से सोशल मीडिया पर पहचान उजागर होने और अनचाहे संपर्क की शिकायतों के बाद NPCI ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

मोबाइल नंबर होंगे मास्क

NPCI ने सभी UPI ऐप्स और सदस्य बैंकों को निर्देश दिया है कि वे ग्राहकों के मोबाइल नंबर, UPI ID और बैंक अकाउंट जैसी संवेदनशील जानकारी को कस्टमर इंटरफेस पर मास्क करें। नए नियम लागू होने के बाद दूसरे व्यक्ति को केवल मोबाइल नंबर के आखिरी चार अंक ही दिखाई देंगे। QR कोड से भुगतान के बाद भी ऐप पर पूरा नंबर नहीं दिखेगा। इन बदलावों को लागू करने के लिए 4 सितंबर तक की समयसीमा तय की गई है।

यूजरनेम आधारित UPI ID को मिलेगा बढ़ावा

अभी अधिकांश लोग मोबाइल नंबर को ही अपनी UPI ID के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि UPI में पहले से यूजरनेम आधारित Virtual Payment Address (VPA) बनाने का विकल्प मौजूद है, लेकिन बहुत कम लोग इसका उपयोग करते हैं। अब UPI ऐप्स को यह सुविधा देनी होगी कि यूजर मोबाइल नंबर की जगह अपनी पसंद का यूजरनेम चुन सके और उसे डिफॉल्ट UPI ID के रूप में सेट कर सके। इससे लेनदेन के दौरान मोबाइल नंबर साझा करने की जरूरत काफी कम हो जाएगी।

सिर्फ नंबर छिपाना क्यों नहीं है पर्याप्त?

डेटा सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मोबाइल नंबर मास्क करने से प्राइवेसी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। यदि किसी सिस्टम में पूरा नाम, बैंक से जुड़ी अन्य जानकारी या पहचान योग्य डेटा उपलब्ध रहता है, तो डेटा लीक या दुरुपयोग का खतरा बना रह सकता है। इसलिए DPDP कानून के तहत डेटा कलेक्शन, स्टोरेज और प्रोसेसिंग के पूरे ढांचे को मजबूत करना भी जरूरी होगा।

DPDP कानून के तहत बढ़ेंगी जिम्मेदारियां

नए डेटा प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क के लागू होने के बाद UPI ऐप्स और बैंकों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों का व्यक्तिगत डेटा केवल जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल हो, सुरक्षित रखा जाए और किसी भी तरह की अनधिकृत पहुंच से बचाया जाए। इसी को लेकर NPCI विभिन्न बैंकों और पेमेंट ऐप्स के साथ लगातार चर्चा कर रहा है।

यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?

  • मोबाइल नंबर की पूरी जानकारी नहीं दिखेगी।
  • QR पेमेंट के बाद भी नंबर छिपा रहेगा।
  • यूजरनेम आधारित UPI ID को बढ़ावा मिलेगा।
  • व्यक्तिगत जानकारी पहले से अधिक सुरक्षित रहेगी।
  • डिजिटल पेमेंट में प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।

कुल मिलाकर, UPI को सुरक्षित बनाने की दिशा में मोबाइल नंबर मास्क करना एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है, लेकिन डिजिटल प्राइवेसी को पूरी तरह मजबूत करने के लिए डेटा सुरक्षा से जुड़े व्यापक बदलावों और DPDP कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की भी उतनी ही आवश्यकता होगी।

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