पंजाब यूनिवर्सिटी करंट हादसा: पीएचडी स्कॉलर की मौत के बाद परिवार को ₹61 लाख की आर्थिक सहायता, भाई को मिलेगी नौकरी

Knews Desk- पंजाब यूनिवर्सिटी में करंट लगने से पीएचडी शोधार्थी ज्योति की दर्दनाक मौत के मामले में प्रशासन और परिजनों के बीच आखिरकार सहमति बन गई है। लंबे समय तक चले विरोध और बातचीत के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मृतका के परिवार को कुल 61 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनके छोटे भाई को विश्वविद्यालय में नौकरी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस समझौते के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसे अंतिम संस्कार के लिए हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित उनके पैतृक गांव ले जाया गया।

प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मृतका के परिवार को मिलने वाली कुल सहायता राशि में 11 लाख रुपये डीन स्टूडेंट वेलफेयर (DSW) फंड से और 50 लाख रुपये कुलपति (VC) के विवेकाधीन फंड से दिए जाएंगे। इसके अलावा, ज्योति के छोटे भाई, जिन्होंने आईटीआई से इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी में उपयुक्त नौकरी देने का आश्वासन दिया गया है। परिजनों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद पोस्टमार्टम कराने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

28 वर्षीय ज्योति हरियाणा के रेवाड़ी जिले की रहने वाली थीं और पंजाब यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पीएचडी कर रही थीं। वह यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल नंबर-10 में रहती थीं। मंगलवार सुबह वह अपने विभाग की ओर जा रही थीं। इसी दौरान गर्ल्स हॉस्टल-8 और यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (UIET) के बीच बने कच्चे रास्ते पर बारिश का पानी जमा हुआ था।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, पास में लगे एक बिजली के खंभे में शॉर्ट सर्किट हो गया था, जिससे पानी में करंट फैल गया। अनजाने में जैसे ही ज्योति उस पानी से होकर गुजरीं, वह करंट की चपेट में आ गईं और मौके पर ही गिर पड़ीं। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने पूरे विश्वविद्यालय परिसर को झकझोर कर रख दिया।

हालांकि प्रशासन और परिवार के बीच समझौता हो चुका है, लेकिन विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ है। छात्रों का आरोप है कि यह हादसा प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है और समय रहते बिजली व्यवस्था तथा जलभराव की समस्या पर ध्यान दिया जाता तो एक होनहार शोधार्थी की जान बचाई जा सकती थी।

हादसे के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने कुलपति आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि वे कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

अब छात्र संगठन बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। इसमें यह निर्णय लिया जाएगा कि प्रशासन के खिलाफ आंदोलन जारी रखा जाए या विश्वविद्यालय द्वारा उठाए जाने वाले सुरक्षा उपायों का इंतजार किया जाए। फिलहाल, यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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