KNEWS DESK- आज, 29 जुलाई 2026 को देशभर में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए समर्पित माना जाता है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि यदि उनका कोई आध्यात्मिक गुरु नहीं है या वे अपने गुरु के पास नहीं पहुंच सकते, तो क्या गुरु पूर्णिमा पर माता-पिता की पूजा करना उचित है? धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, माता-पिता का सम्मान करना भी गुरु की वंदना के समान माना गया है।
माता-पिता को क्यों कहा जाता है पहला गुरु?
भारतीय संस्कृति में माता-पिता को संतान का पहला गुरु माना गया है। जन्म के बाद बच्चा सबसे पहले उन्हीं से बोलना, चलना, व्यवहार करना और जीवन के मूल संस्कार सीखता है। सही और गलत का ज्ञान, अनुशासन, प्रेम, करुणा और जिम्मेदारियों की पहली शिक्षा भी माता-पिता ही देते हैं। यही कारण है कि उन्हें जीवन का प्रथम मार्गदर्शक माना गया है।
गुरु पूर्णिमा पर माता-पिता का सम्मान करना शुभ माना जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का कोई दीक्षा गुरु नहीं है, तो वह गुरु पूर्णिमा के दिन अपने माता-पिता का सम्मान कर सकता है। उनके चरण स्पर्श करना, आशीर्वाद लेना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में परिवार और संस्कारों के महत्व को भी दर्शाता है।
शास्त्रों में गुरु का स्थान क्यों है सर्वोच्च?
सनातन धर्म में गुरु को वह माना गया है जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देता है। गुरु व्यक्ति को धर्म, सत्य और आत्मबोध की ओर प्रेरित करता है। इसी कारण गुरु पूर्णिमा मुख्य रूप से गुरु के प्रति सम्मान और उनके उपकारों को स्मरण करने का पर्व है। यदि जीवन में आध्यात्मिक गुरु उपलब्ध न हों, तो माता-पिता और जीवन में सही मार्ग दिखाने वाले वरिष्ठजनों का सम्मान करना भी इस भावना का विस्तार माना जाता है।
माता-पिता का सम्मान करना भी गुरु वंदना का ही रूप
धार्मिक दृष्टि से माता-पिता का आदर करना गुरु का आदर करने के समान माना गया है। वे केवल पालन-पोषण ही नहीं करते, बल्कि जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर मार्गदर्शन भी देते हैं। गुरु पूर्णिमा पर उनका आशीर्वाद लेना परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
गुरु पूर्णिमा पर माता-पिता का सम्मान कैसे करें?
गुरु पूर्णिमा के दिन माता-पिता के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें। उन्हें फल, मिठाई, वस्त्र या अपनी श्रद्धा के अनुसार कोई उपहार भेंट कर सकते हैं। यदि वे आपके साथ नहीं हैं, तो फोन पर उनका आशीर्वाद लें या मन ही मन उनका स्मरण करें। उनके दिए गए संस्कारों और सीख को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेना भी उनके प्रति सच्चा सम्मान माना जाता है।
गुरु पूर्णिमा का संदेश
गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान देने वाले हर व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। यदि आपके जीवन में कोई आध्यात्मिक गुरु नहीं है, तो माता-पिता, शिक्षक या ऐसे किसी व्यक्ति का सम्मान करें जिसने आपको सही दिशा दिखाई हो। यही इस पावन पर्व की वास्तविक भावना मानी जाती है।