KNEWS DESK- संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार आज (29 जुलाई) जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश करेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन के पटल पर रखेंगे। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और सुरक्षित बनाना है, ताकि फर्जीवाड़े पर लगाम लगाई जा सके और नागरिकों को प्रमाणपत्र प्राप्त करने में आसानी हो।
नए विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव देर से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियमों को लेकर किया गया है। इसके साथ ही देशभर के जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड को एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस से जोड़ने की योजना भी शामिल है, जिसे आधार, मतदाता सूची, राशन कार्ड और पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों से लिंक किया जाएगा।
देर से पंजीकरण के लिए सख्त होंगे नियम
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक से दो वर्ष की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
वहीं, यदि पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक की देरी होती है, तो मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष जाएगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही पंजीकरण की अनुमति देंगे। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
सत्यापन और फीस दोनों अनिवार्य
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि देर से पंजीकरण कराने वाले प्रत्येक मामले का गहन सत्यापन किया जाएगा। संबंधित अधिकारी सभी दस्तावेजों और तथ्यों की जांच करेंगे, जिसके बाद ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
इसके अलावा, विलंब से पंजीकरण कराने पर निर्धारित शुल्क भी देना होगा। हालांकि, शुल्क की राशि इस अधिनियम के तहत बनाए जाने वाले नियमों के माध्यम से अलग से अधिसूचित की जाएगी।
पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
सरकार जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत देशभर के सभी जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड को एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस में संग्रहीत किया जाएगा।
इस डेटाबेस को आधार कार्ड, मतदाता सूची, राशन कार्ड, पासपोर्ट सहित अन्य सरकारी रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। इससे विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान होगा और एक ही जानकारी के लिए बार-बार दस्तावेज जमा कराने की जरूरत कम होगी।
ऑनलाइन मिलेंगे जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नागरिकों को जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रमाणपत्र ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सरल और तेज हो जाएगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे, पारदर्शिता बढ़ेगी और दस्तावेजों के सत्यापन में भी आसानी होगी।
जन्म प्रमाणपत्र की बढ़ेगी अहमियत
प्रस्तावित संशोधन के तहत जन्म प्रमाणपत्र को कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रमुख दस्तावेज के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। इसमें स्कूल में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना, सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि जन्म प्रमाणपत्र किसी व्यक्ति की पहली कानूनी पहचान होता है और भविष्य में विभिन्न सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने के लिए इसकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।
मृत्यु प्रमाणपत्र भी रहेगा जरूरी दस्तावेज
मृत्यु प्रमाणपत्र पहले की तरह विरासत संबंधी मामलों, बीमा दावों, पेंशन लाभ, संपत्ति हस्तांतरण, बैंक खाते बंद कराने और सरकारी रिकॉर्ड अपडेट कराने जैसे कानूनी कार्यों के लिए अनिवार्य रहेगा।
सरकार के अनुसार, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत जारी प्रमाणपत्र कानूनी रूप से जन्म या मृत्यु का वैध प्रमाण माने जाते हैं। इसलिए इन दस्तावेजों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पंजीकरण प्रणाली को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाना आवश्यक है।
फर्जीवाड़ा रोकने पर सरकार का जोर
सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का मुख्य उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना, फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाना और सभी रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण की पूरी व्यवस्था अधिक आधुनिक, डिजिटल और जवाबदेह हो जाएगी।