युवा सांसदों के साथ NDA करेगा बिल पर चर्चा, पेपर लीक रोकने को संसद में आएगा नया कानून

KNEWS DESK- नीट पेपर लीक विवाद और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश करेगी। शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद में पेश होने वाला यह पहला बड़ा विधायी कदम होगा। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में इस विधेयक को पेश करेंगे।

सरकार की ओर से इस बिल पर चर्चा के लिए एनडीए के युवा सांसदों को आगे किया जाएगा। लोकसभा में विधेयक पर करीब 8 से 10 घंटे तक लंबी चर्चा होने की संभावना है। बीजेपी की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या समेत कई युवा सांसद बहस में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा एनडीए के सहयोगी दलों के कई सांसद भी विधेयक पर अपनी बात रखेंगे। सत्तापक्ष की रणनीति के तहत विभिन्न दलों के युवा सांसदों को चर्चा में शामिल किया जा रहा है। एनसीपी, टीएमसी और अन्य सहयोगी दलों से जुड़े सांसदों के नाम भी वक्ताओं की सूची में शामिल हैं। इनमें सयोनी घोष, मिताली बाग, टीडीपी के लावु श्री कृष्ण देवरायलु, जेडीयू के लल्लन सिंह, शिवसेना के डॉ. श्रीकांत शिंदे, एनसीपी के सुनील तटकरे, अपना दल की अनुप्रिया पटेल और लोजपा रामविलास के अरुण भारती जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं।

विधेयक का मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों पर सख्ती से रोक लगाना है। सरकार का प्रस्ताव है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए जाएं। प्रस्तावित संशोधन में संगठित पेपर लीक अपराधों के लिए अधिकतम सजा बढ़ाकर 10 साल तक करने का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा संगठित नकल गिरोहों पर लगने वाले जुर्माने की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव है।

बिल में “अनफेयर मीन्स” यानी अनुचित तरीकों की परिभाषा को भी व्यापक बनाने की तैयारी है, ताकि परीक्षा में धोखाधड़ी के नए डिजिटल तरीकों और आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग को भी कानून के दायरे में लाया जा सके। इसके साथ ही पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी में शामिल संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही तय करने के लिए कड़े प्रावधान किए जाएंगे। सरकार जांच और अभियोजन प्रक्रिया को भी मजबूत करना चाहती है, ताकि संगठित परीक्षा माफिया और नकल सिंडिकेट के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा सके। सरकार का दावा है कि इससे लाखों छात्रों के हितों की रक्षा होगी और परीक्षा प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा।

इस बीच संसद के मॉनसून सत्र में विपक्ष भी नीट पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है। विपक्षी दलों ने कहा है कि वे सदन की विधायी कार्यवाही में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर सदन में बयान देने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर जवाब मांगा है। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और यह 13 अगस्त तक चलेगा। ऐसे में परीक्षा सुधार से जुड़ा यह विधेयक सरकार और विपक्ष के बीच एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

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