Knews Desk- सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने दोनों की चमक फीकी कर दी है। बाजार की निगाह अब अगले सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है, क्योंकि उसके फैसले का असर कीमती धातुओं की चाल पर पड़ सकता है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। शुक्रवार (24 जुलाई) को ही सोना करीब 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट गया, जबकि पिछले दो कारोबारी सत्रों में इसकी कीमत में 4,600 रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
चांदी में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार को इसकी कीमत में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। एमसीएक्स (MCX) पर चांदी अपने ऑल टाइम हाई से करीब 2.02 लाख रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आ चुकी है।
इस साल जनवरी में चांदी का भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था, लेकिन उसके बाद बाजार का रुख पूरी तरह बदल गया। अब इसकी कीमत लगभग 2.19 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है।
ताजा सोना-चांदी के भाव
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतें इस प्रकार रहीं—
- 24 कैरेट सोना: ₹1,42,757 प्रति 10 ग्राम
- 22 कैरेट सोना: ₹1,30,765 प्रति 10 ग्राम
- 18 कैरेट सोना: ₹1,07,068 प्रति 10 ग्राम
- 14 कैरेट सोना: ₹83,513 प्रति 10 ग्राम
- चांदी: ₹2,19,556 प्रति किलोग्राम
सोना-चांदी क्यों हो रहे हैं सस्ते?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने सोने पर दबाव बढ़ा दिया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान को लेकर अमेरिका की सख्त चेतावनी और लाल सागर में बढ़ती गतिविधियों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
महंगे तेल की वजह से अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड मजबूत हुए हैं। आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर सोने की मांग घटती है, क्योंकि दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा पड़ता है। यही वजह है कि सोने और चांदी दोनों की कीमतों में लगातार कमजोरी बनी हुई है।
अगले सप्ताह क्यों रहेगा अहम?
अमेरिका में बेरोजगारी भत्ता मांगने वालों की संख्या घटकर 1.87 लाख रह गई है, जो कई दशक का निचला स्तर माना जा रहा है। मजबूत रोजगार आंकड़ों से यह संभावना बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व फिलहाल सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है या ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है।
अगर फेड महंगाई पर काबू पाने के लिए सख्त रुख अपनाता है, तो डॉलर को और मजबूती मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, निवेशकों की नजर फेड की बैठक और उसके संकेतों पर रहेगी, जो आगे की दिशा तय करेंगे।