Knews Desk- ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले भारतीय दल को बड़ा झटका लगा है। डोपिंग मामलों और क्लासिफिकेशन से जुड़े मुद्दों के कारण कई खिलाड़ियों को टीम से बाहर होना पड़ा है। इसके साथ ही भारत का वेटलिफ्टिंग कोटा भी घटा दिया गया है, जिससे अंतिम टीम में बदलाव करना पड़ा।
वेटलिफ्टिंग में भारत का कोटा 16 से घटकर 11
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए भारत के वेटलिफ्टिंग कोटे में बड़ी कटौती की गई है। पहले जहां भारत को 16 कोटा स्थान मिले थे, अब यह घटकर 11 रह गए हैं। भारतीय भारोत्तोलन महासंघ (IWLF) के अनुसार, क्वालिफिकेशन अवधि के दौरान भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ सामने आए कई एंटी-डोपिंग नियम उल्लंघन (ADRV) मामलों की वजह से यह फैसला लिया गया।
कोटा कम होने के कारण 12 सदस्यीय भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम में बदलाव करना पड़ा और दिलबाग सिंह को टीम से बाहर कर दिया गया। महासंघ ने बताया कि दिलबाग पीठ की चोट से भी परेशान थे और बर्मिंघम में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा नहीं ले सके थे। वहीं एन. अजीत, साईराज परदेशी, हरचरण सिंह और वंशिता वर्मा पर भी डोपिंग उल्लंघन के चलते प्रतिबंध लगाया गया है।
डोप टेस्ट में फेल हुए जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार
भारतीय जूडो टीम को भी बड़ा झटका लगा है। 73 किलोग्राम वर्ग के युवा जूडोका अरुण कुमार डोप टेस्ट में फेल पाए गए हैं। राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) की जांच में उनके सैंपल में प्रतिबंधित एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलने के बाद उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।
21 वर्षीय अरुण कुमार ने पिछले वर्ष ताइपे एशियन ओपन में स्वर्ण पदक जीतकर पहचान बनाई थी। उनके बाहर होने से भारत की पदक उम्मीदों को नुकसान पहुंचा है।
भारतीय दल की संख्या भी हुई कम
डोपिंग मामलों के अलावा पैरा-स्विमर तेजस नंदकुमार आवश्यक क्लासिफिकेशन मानकों को पूरा नहीं कर सके, जिसके चलते उन्हें भी टीम से बाहर होना पड़ा। इन घटनाओं के बाद भारत के दल का आकार 126 से घटकर 124 सदस्यीय रह गया है।
हालांकि, भारतीय टीम को अब भी स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और जूडो खिलाड़ी तूलिका मान से पदक की उम्मीदें हैं। भारतीय जूडो टीम 27 जुलाई को ग्लासगो के लिए रवाना होगी।