‘संसद चलो’ मार्च में पुलिस कार्रवाई पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस; चार हफ्ते में मांगा जवाब
Knews Desk- दिल्ली में हुए “संसद चलो” मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकीलों ने दिल्ली पुलिस के एडीसीपी संदीप लांबा पर एक महिला प्रदर्शनकारी के साथ कथित तौर पर मारपीट करने का आरोप लगाया। अदालत ने फिलहाल आरोपों पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है, लेकिन घटना से जुड़े सभी वीडियो फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए हैं।
मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने अदालत को बताया कि उनकी टीम ने प्रदर्शन से जुड़े करीब 130 वीडियो की जांच की है। उन्होंने दावा किया कि कई वीडियो में पुलिसकर्मी बिना पहचान बैज और बिना वर्दी के प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं।
वकील ने अदालत में एक वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (ADCP) संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई पुलिस अधिकारी कानून तोड़ता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने क्या दिया आदेश?
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
इसके अलावा कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं, ताकि आगे की सुनवाई में इनका इस्तेमाल किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लगाया ज्यादा बल प्रयोग का आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं एन. हरिहरन, गोपाल शंकरनारायण और विकास सिंह ने अदालत में दलील दी कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि लोगों को संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत प्रदर्शन करने का अधिकार है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। उन्होंने दावा किया कि लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 90 से ज्यादा लोग घायल हुए। साथ ही पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।
दिल्ली पुलिस ने आरोपों को बताया एकतरफा
वहीं दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने इन आरोपों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि याचिकाएं सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो के आधार पर दाखिल की गई हैं, जिनकी पुष्टि अभी बाकी है।
उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए थे और कई जगह पुलिसकर्मियों पर हमला, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के साथ कोई अपराध हुआ है तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया मौजूद है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
ADCP संदीप लांबा ने क्या कहा?
आरोपों के बीच एडीसीपी संदीप लांबा का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की और पुलिस पर पथराव किया गया। उन्होंने बताया कि एक पत्थर उनके घुटने पर लगा, जिससे उन्हें चोट आई। उनका यह भी दावा है कि धक्का-मुक्की के दौरान उनकी वर्दी फट गई थी।
प्रदर्शन के बाद दर्ज हुईं कई एफआईआर
दिल्ली पुलिस के मुताबिक “संसद चलो” मार्च के दौरान हिंसा, पथराव और तोड़फोड़ के मामलों में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। ये मामले पार्लियामेंट स्ट्रीट, बाराखंबा रोड और कनॉट प्लेस समेत अलग-अलग थानों में दर्ज किए गए हैं।
पुलिस ने इन मामलों में सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, दंगा और अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की है। अब पूरे मामले में हाई कोर्ट के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हैं।