सिर्फ पहचान पत्र नहीं, बैंकिंग से लेकर सरकारी योजनाओं और कानूनी मामलों तक आधार बन चुका है जरूरी दस्तावेज
Knews Desk- आधार कार्ड को अब सिर्फ पहचान साबित करने वाला दस्तावेज मानना काफी नहीं है। देश में यह कई सरकारी और निजी सेवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में शामिल हो चुका है। हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट की एक टिप्पणी के बाद आधार कार्ड की भूमिका फिर चर्चा में आ गई है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड किसी संपत्ति के मालिकाना हक का पक्का सबूत नहीं है, लेकिन किसी व्यक्ति के वहां रहने का शुरुआती प्रमाण जरूर माना जा सकता है।
कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर आधार कार्ड का इस्तेमाल किन-किन जगहों पर होता है और यह आम लोगों के लिए कितना जरूरी है।
कलकत्ता HC ने आधार को लेकर क्या कहा?
कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने गार्डन रीच इलाके में बेदखली और तोड़फोड़ की कार्रवाई पर सुनवाई करते हुए कहा कि आधार कार्ड किसी संपत्ति पर अधिकार साबित नहीं करता। हालांकि, यह इस बात का प्रारंभिक प्रमाण हो सकता है कि कोई व्यक्ति उस जगह पर रह रहा है।
अदालत ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास आधार कार्ड जैसे दस्तावेज मौजूद हैं, तो उसे बिना नोटिस दिए हटाया नहीं जा सकता। प्रशासन को पहले कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी, नोटिस देना होगा और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका देना होगा।
आधार कार्ड से जुड़े 6 बड़े फायदे
1. पहचान और पते का प्रमाण
आधार कार्ड देशभर में सबसे ज्यादा स्वीकार किए जाने वाले पहचान पत्रों में से एक है। इसका इस्तेमाल पहचान और एड्रेस प्रूफ दोनों के तौर पर किया जाता है।
2. सरकारी योजनाओं का लाभ
एलपीजी सब्सिडी, पेंशन, स्कॉलरशिप और कई अन्य सरकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते तक पहुंचाने में आधार की अहम भूमिका होती है।
3. बैंकिंग से जुड़े काम
नया बैंक खाता खुलवाने, ई-केवाईसी कराने, डीमैट अकाउंट शुरू करने और कई वित्तीय सेवाओं में आधार जरूरी होता है।
4. मोबाइल और डिजिटल सेवाएं
नया सिम कार्ड लेने, डिजिलॉकर का इस्तेमाल करने और ई-साइन जैसी डिजिटल सुविधाओं में आधार वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ती है।
5. टैक्स और पैन से जुड़े काम
इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने और पैन कार्ड को आधार से लिंक करने जैसी प्रक्रियाओं में भी आधार का इस्तेमाल किया जाता है।
6. कानूनी मामलों में मददगार दस्तावेज
हालांकि आधार किसी संपत्ति के मालिकाना हक का प्रमाण नहीं है, लेकिन कई मामलों में यह व्यक्ति की मौजूदगी या निवास का शुरुआती सबूत बन सकता है।
बिना कानूनी प्रक्रिया के नहीं होगी बेदखली
यह मामला कोलकाता के गार्डन रीच इलाके का है, जहां कई लोगों ने दावा किया था कि वे लंबे समय से वहां रह रहे हैं। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए।
हाईकोर्ट ने माना कि ऐसे दस्तावेज यह दिखाने के लिए पर्याप्त हैं कि संबंधित व्यक्ति उस जगह पर रह रहा है। इसलिए प्रशासन को पहले नोटिस देना होगा और कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बिना सुनवाई के किसी को हटाना उचित नहीं होगा।
हर जरूरी काम में आधार की बढ़ती भूमिका
आज आधार कार्ड बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, डिजिटल सुविधाओं और पहचान सत्यापन का प्रमुख माध्यम बन चुका है। पासपोर्ट आवेदन, ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल कनेक्शन और कई अन्य सेवाओं में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
इसके अलावा रेलवे यात्रा और हवाई यात्रा के दौरान भी कई लोग आधार को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
डिजिटल इंडिया में आधार बना बड़ा आधार
आधार आधारित सेवाओं ने कई प्रक्रियाओं को आसान बनाया है। आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के जरिए लोग बायोमेट्रिक की मदद से बैंकिंग सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। वहीं डिजिलॉकर जैसी सेवाओं में दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने में भी आधार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हाईकोर्ट के फैसले से क्या साफ हुआ?
कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले ने स्पष्ट कर दिया कि आधार कार्ड को न तो संपत्ति का मालिकाना हक साबित करने वाला दस्तावेज माना जा सकता है और न ही इसे नजरअंदाज किया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि अगर आधार कार्ड किसी व्यक्ति के किसी जगह पर रहने की ओर इशारा करता है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए। यही वजह है कि यह फैसला आधार कार्ड की उपयोगिता और नागरिकों के अधिकारों दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।