KNEWS DESK- राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हिंसा और उपद्रव का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर के आसपास हुए प्रदर्शन के दौरान उग्र भीड़ द्वारा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान पर कथित हमले के मामले में अब तक कुल 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि घटना की जांच तेजी से की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। पुलिस के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात एक RAF जवान भीड़ के बीच फंस गया, जिसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने उस पर हमला कर दिया। जवान को कथित तौर पर जमीन पर गिराकर लात-घूंसों और डंडों से पीटा गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर जवान को भीड़ से बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विभिन्न थानों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में चार, कनॉट प्लेस थाने में तीन, जबकि मंदिर मार्ग, बाराखंभा रोड और कर्तव्य पथ थानों में एक-एक मामला दर्ज किया गया है। इन मामलों में सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमला करने, दंगा, अवैध जमावड़ा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं।
पुलिस ने यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान हाई सिक्योरिटी जोन में कथित तौर पर अवैध रूप से ड्रोन उड़ाने का मामला भी सामने आया है। इस संबंध में संसद मार्ग थाने में अलग से मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध है और प्रतिबंध के बावजूद ड्रोन का इस्तेमाल सरकारी आदेश की अवहेलना माना गया है।
दिल्ली पुलिस की जांच कई पहलुओं पर केंद्रित है। सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, मीडिया फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की मदद से उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने हिंसा में भाग लिया या सुरक्षा बलों पर हमला किया। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान होने के बाद उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें लोक सेवक के वैध कर्तव्य में बाधा पहुंचाना, सरकारी आदेश की अवज्ञा करना, लोक सेवक पर हमला करना, गैरकानूनी जमावड़े के दौरान चोट पहुंचाना, दंगा करना, दंगे के लिए उकसाना, हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (PDPP Act) के प्रावधान शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपों की कानूनी जांच की जा रही है।
इस बीच, सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। संसद, कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था का पालन करने की अपील भी की है।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या सुरक्षा बलों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। पुलिस का कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।