KNEWS DESK- दिल्ली सरकार ने जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल के खिलाफ गंभीर लापरवाही और कथित अनियमितताओं को लेकर सख्त कदम उठाया है। शिक्षा निदेशालय ने स्कूल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। आरोप है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी, अवैध शाखा संचालन, CCTV व्यवस्था में खामियां और वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिए हैं कि यदि स्कूल प्रबंधन तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं देता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। सरकार ने जरूरत पड़ने पर स्कूल का प्रबंधन अपने अधीन लेने और जमीन की लीज रद्द करने तक की चेतावनी दी है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।
जांच में सामने आईं कई गंभीर खामियां
शिक्षा निदेशालय की विभिन्न समितियों की जांच में स्कूल प्रशासन से जुड़ी कई कमियां सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल में बाल सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
जांच में आरोप लगाया गया कि 30 अप्रैल 2026 को प्री-प्राइमरी शाखा में एक नर्सरी छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी, जिसकी जानकारी स्कूल प्रबंधन ने अनिवार्य नियमों के बावजूद शिक्षा विभाग को नहीं दी।
इसके अलावा पुलिस जांच के दौरान प्री-प्राइमरी परिसर में लगे सभी 64 CCTV कैमरे बंद पाए गए। आरोप है कि स्कूल ने CCTV के रखरखाव के लिए जरूरी व्यवस्था नहीं की थी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
बिना अनुमति चल रही थी शाखा
जांच में यह भी सामने आया कि स्कूल कथित तौर पर बिना अनुमति के नारंग कॉलोनी स्थित एक निजी आवासीय भवन में नर्सरी और केजी की कक्षाएं संचालित कर रहा था। आरोप है कि इस भवन के बेसमेंट का इस्तेमाल छोटे बच्चों की गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जो सुरक्षा मानकों के खिलाफ है।
स्कूल में बाल संरक्षण व्यवस्था को लेकर भी कमियां बताई गई हैं। आरोप है कि वहां न तो चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी मौजूद थी, न चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी बनाई गई थी और न ही पॉक्सो कानून के तहत प्रशिक्षित नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसके अलावा सुरक्षा कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन में भी लापरवाही का आरोप लगाया गया है।
फायर NOC और सुविधाओं पर भी सवाल
जांच रिपोर्ट में बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि स्कूल में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण अभिभावकों को बच्चों के साथ अतिरिक्त पानी की बोतलें भेजनी पड़ती थीं।
वहीं, स्कूल का फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र वर्ष 2020 में समाप्त हो चुका था और इसे अब तक नवीनीकृत नहीं कराया गया था।
वित्तीय अनियमितताओं का आरोप
स्कूल प्रबंधन पर वित्तीय मामलों में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभ के लिए रखी गई करीब छह करोड़ रुपये की राशि दूसरी शाखा को कथित तौर पर “लोन सेटलमेंट” के नाम पर ट्रांसफर की गई।
इसके अलावा स्कूल फंड से प्रबंधकों और ट्रस्टियों को कथित रूप से अनधिकृत प्रोफेशनल फीस दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी तथा वेतनमान से जुड़े नियमों की अनदेखी का भी मामला सामने आया है। साथ ही आरोप है कि स्कूल ने 2025-26 सत्र में निर्धारित नियमों के विपरीत 15 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी की।
सरकार ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
दिल्ली सरकार ने स्कूल प्रबंधन से पूछा है कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। संभावित कार्रवाई में दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के तहत स्कूल का प्रबंधन सरकार के अधीन लेना शामिल है।
इसके अलावा रियायती दर पर मिली जमीन की लीज रद्द करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को सिफारिश भेजने और बाल सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले में पॉक्सो एक्ट तथा किशोर न्याय अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की भी बात कही गई है। अब स्कूल प्रबंधन के जवाब के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।