Knews Desk- NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब देशभर के लाखों छात्र MBBS और BDS काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MBBS सीट मैट्रिक्स जारी कर दिया है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सीटों की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है। सीट मैट्रिक्स के अनुसार दोनों राज्यों में इस साल सीटों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे मेडिकल की पढ़ाई का सपना देखने वाले छात्रों को राहत मिल सकती है।मध्य प्रदेश की बात करें तो राज्य में इस समय 20 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इन कॉलेजों में पहले 2,900 MBBS सीटें थीं, लेकिन इस वर्ष 120 नई सीटें जोड़ी गई हैं। इसके बाद सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 3,020 हो गई है। वहीं, राज्य के 14 निजी मेडिकल कॉलेजों में पहले से मौजूद सीटों के अलावा 300 नई सीटें जोड़ी गई हैं, जिससे निजी कॉलेजों में कुल MBBS सीटों की संख्या 3,000 तक पहुंच गई है।इस तरह मध्य प्रदेश में अब कुल 34 मेडिकल कॉलेज हैं और MBBS की कुल 6,020 सीटें उपलब्ध हैं। पिछले साल की तुलना में राज्य में कुल 420 नई सीटों का इजाफा हुआ है। इससे NEET UG 2026 में सफल छात्रों के लिए प्रवेश के अवसर पहले के मुकाबले बेहतर हो सकते हैं।
अगर राजस्थान की बात करें तो यहां सरकारी मेडिकल शिक्षा का दायरा मध्य प्रदेश से बड़ा है। राज्य में 33 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें कुल 4,480 MBBS सीटें उपलब्ध हैं। हालांकि इस वर्ष सरकारी कॉलेजों में सीटों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेजों में इस बार बड़ा विस्तार देखने को मिला है। राज्य के 18 निजी मेडिकल कॉलेजों में 900 नई MBBS सीटें जोड़ी गई हैं। इसके बाद निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़कर 3,600 हो गई है।
राजस्थान में अब कुल 51 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 8,080 MBBS सीटें हैं। इस वर्ष जितनी भी नई सीटें बढ़ाई गई हैं, वे पूरी तरह निजी मेडिकल कॉलेजों में जोड़ी गई हैं। इससे उन छात्रों को अधिक विकल्प मिलेंगे जो निजी संस्थानों में दाखिला लेने की योजना बना रहे हैं।NEET UG 2026 का परिणाम घोषित होने के बाद अब मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) और संबंधित राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण जल्द ही काउंसलिंग का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर सकते हैं। इसके बाद छात्र अपनी रैंक, कैटेगरी और पसंद के अनुसार मेडिकल कॉलेजों का चयन कर सकेंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि MBBS सीटों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से मेडिकल शिक्षा का दायरा और मजबूत होगा। इससे डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में भी मदद मिलेगी और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। वहीं, छात्रों के लिए भी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के अवसर पहले की तुलना में अधिक होंगे, खासकर उन राज्यों में जहां नई सीटें जोड़ी गई हैं।