Knews Desk- हिंदू धर्म में संक्रांति का विशेष महत्व माना जाता है। जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तब संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। 16 जुलाई 2026, गुरुवार को सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे कर्क संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से सूर्य देव के दक्षिणायन की शुरुआत होती है। दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि का प्रारंभ माना जाता है और यह समय आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और आत्मचिंतन के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि, यश और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
द्रिक पंचांग के अनुसार, कर्क संक्रांति का पुण्य काल 16 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर शाम 7 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में स्नान, दान, जप और पूजा करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। इसलिए इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यदि किसी कारणवश तीर्थ या नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने और उनकी विधिवत पूजा करने की परंपरा है।
कर्क संक्रांति के दिन सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और रोली डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य आत्मविश्वास, ऊर्जा, सम्मान और नेतृत्व क्षमता के कारक ग्रह हैं। इसलिए उनकी उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और कई प्रकार की बाधाएं दूर होने लगती हैं। इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करना भी लाभकारी माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कर्क संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। इस दिन गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल वस्त्र, मसूर की दाल और मौसमी फलों का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा किसी गरीब, जरूरतमंद या भूखे व्यक्ति को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति तथा परिवार में खुशहाली बनी रहती है। साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है और जीवन की कई परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
कर्क संक्रांति केवल सूर्य के राशि परिवर्तन का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, सेवा और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ-साथ जरूरतमंदों की सहायता, पशु-पक्षियों को भोजन और जल देना तथा प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करना भी शुभ माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि जो व्यक्ति कर्क संक्रांति के दिन श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक सूर्य देव की आराधना करता है, उसके जीवन में मान-सम्मान, स्वास्थ्य, सफलता और मानसिक शांति का विस्तार होता है। इसलिए इस पावन अवसर पर पुण्य काल का लाभ उठाते हुए स्नान, दान और सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिए।