क्या अंग्रेजी भी भारत की भाषा बन चुकी है? CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

KNEWS DESK- क्या अंग्रेजी को अब भारत की भाषाओं में शामिल माना जा सकता है? यह सवाल शायद बहुत कम लोगों ने सोचा होगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद इस पर नई बहस शुरू हो गई है। मामला CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़ा है, जिसके तहत कक्षा 6 से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ने का प्रावधान किया गया है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या अंग्रेजी को भी भारत की स्थानीय भाषा माना जा सकता है? कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत में अंग्रेजी का इस्तेमाल शिक्षा, न्याय व्यवस्था, प्रशासन और रोजगार के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होता है। आज देश के लाखों युवाओं के करियर और प्रोफेशनल अवसर अंग्रेजी भाषा की समझ से जुड़े हुए हैं।

CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है। इसका लक्ष्य छात्रों को एक से ज्यादा भाषाओं का ज्ञान देना और देश की भाषाई विविधता को मजबूत करना है। नीति के तहत छात्रों को अंग्रेजी के साथ हिंदी और किसी अन्य भारतीय भाषा को सीखने का अवसर देने की बात कही गई है। हालांकि, इस नीति को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच कई सवाल भी उठे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पहले से मौजूद पढ़ाई के दबाव के बीच एक अतिरिक्त भाषा सीखना छात्रों के लिए चुनौती बन सकता है। वहीं, भाषा विशेषज्ञों का कहना है कि बहुभाषी शिक्षा बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता को बेहतर बना सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं को संरक्षण और बढ़ावा मिलना चाहिए। इसी संदर्भ में कोर्ट ने अंग्रेजी की भूमिका पर सवाल किया। कोर्ट ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े अंग्रेजी बोलने वाले देशों में शामिल है। कई राज्यों में अंग्रेजी का आधिकारिक उपयोग होता है और देश की न्यायपालिका में भी कामकाज का बड़ा हिस्सा अंग्रेजी में होता है। नागालैंड और मेघालय जैसे राज्यों में अंग्रेजी आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट और कई हाई कोर्ट में कानूनी कार्यवाही मुख्य रूप से अंग्रेजी में होती है। ऐसे में अंग्रेजी को पूरी तरह विदेशी भाषा मानकर अलग करना आसान नहीं है।

हालांकि, कोर्ट की टिप्पणी का मतलब यह नहीं है कि अंग्रेजी को भारतीय भाषाओं की सूची में शामिल कर दिया गया है। यह केवल भारत में अंग्रेजी की वर्तमान भूमिका और प्रभाव को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल है। आने वाले समय में शिक्षा नीति, भारतीय भाषाओं के संरक्षण और अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती होगी। इसका उपयोग न्यूज़ आर्टिकल, वीडियो स्क्रिप्ट या डिजिटल कॉपी के रूप में किया जा सकता है। जरूरत हो तो इसे 300 शब्दों की शॉर्ट कॉपी या एंकर स्क्रिप्ट स्टाइल में भी बदला जा सकता है।

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