50% सीटें बढ़ाने का लिखित प्रस्ताव आए तो करेंगे विचार…… परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले का बड़ा बयान

KNEWS DESK- संसद के मानसून सत्र में प्रस्तावित महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करते हुए समर्थन के लिए एक शर्त रखी है।

NCP (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि अगर परिसीमन के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान किया जाता है, तो उनकी पार्टी इस पर समर्थन देने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले इस शर्त को आधिकारिक और लिखित रूप में सामने रखना होगा। सुप्रिया सुले ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि फिलहाल उनकी पार्टी के पास ऐसा कोई लिखित प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि बिना बिल देखे इस पर अंतिम प्रतिक्रिया देना संभव नहीं है। सुले ने कहा कि जैसे ही विधेयक सामने आएगा, वह उसका अध्ययन कर पार्टी का रुख स्पष्ट करेंगी।

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर व्यापक सहमति की जरूरत है। सुप्रिया सुले ने महिला आरक्षण विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि यह कानून संसद में बेहद कम अंतर से पारित हुआ था, इसलिए ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सर्वसम्मति से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सुप्रिया सुले ने यह भी बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष, शिवसेना (उद्धव गुट) के नेताओं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि कई बार राजनीतिक मुद्दों को लेकर गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं, इसलिए वह पार्टी का स्पष्ट रुख सामने रखने आई हैं।

वहीं, परिसीमन बिल को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि नए परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि उन्हें फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा था कि परिसीमन आयोग के पुराने नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और 2029 तक होने वाले चुनाव मौजूदा सीटों के आधार पर ही होंगे। अमित शाह ने यह भी कहा था कि अगर सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि का मॉडल लागू होता है तो लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं। उनके मुताबिक, इससे दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों की संख्या भी बढ़ेगी और वर्तमान 129 सांसदों की संख्या बढ़कर करीब 195 तक पहुंच सकती है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार की ओर से परिसीमन बिल का अंतिम प्रारूप आने के बाद विपक्षी दल किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।