KNEWS DESK- हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ मास की अमावस्या का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सुबह स्नान, तर्पण और दान करने के साथ-साथ शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होने और घर में सुख-शांति व समृद्धि आने की मान्यता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पितरों का तर्पण, पिंडदान और जरूरतमंदों को दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और अपने पूर्वजों की पूजा भी करते हैं।
शाम को पीपल के नीचे दीपक जलाने की परंपरा क्यों है?
धार्मिक ग्रंथों में पीपल के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इसमें भगवान विष्णु का निवास होता है और अमावस्या के दिन इसकी पूजा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए आषाढ़ अमावस्या की शाम पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा प्रचलित है। माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक यह उपाय करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
इस तरह करें सरल उपाय
आषाढ़ अमावस्या की शाम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष के पास जाकर सबसे पहले जल अर्पित करें। फिर सरसों के तेल का दीपक जलाकर वृक्ष के नीचे रखें। दीपक जलाते समय अपने पितरों का स्मरण करें और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करें। इसके बाद पीपल की सात या 11 परिक्रमा करें तथा भगवान विष्णु से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की प्रार्थना करें। अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।
सरसों के तेल का दीपक जलाने का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सरसों के तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। अमावस्या की शाम इसे पीपल के नीचे जलाने से वातावरण में सकारात्मकता का संचार होता है। साथ ही यह उपाय पितरों की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति का सरल माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
आषाढ़ अमावस्या पर करें ये शुभ कार्य
- पवित्र नदी या गंगाजल मिले जल से स्नान करें।
- पितरों के निमित्त तर्पण और पिंडदान करें।
- जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान दें।
- पीपल के वृक्ष की पूजा कर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- भगवान विष्णु का स्मरण करें और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में रीति-रिवाज और परंपराएं भिन्न हो सकती हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले अपने परिवार की परंपरा या योग्य विद्वान की सलाह अवश्य लें।