नए वोटर्स के लिए बदला नियम, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए अब देनी होगी माता-पिता की SIR जानकारी

Knews Desk- चुनाव आयोग (EC) ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और उसे बरकरार रखने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए अपने माता-पिता की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य होगा। आयोग ने यह नियम पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से लागू किया है।

चुनाव आयोग के नए निर्देशों के मुताबिक, जो युवा पहली बार वोटर बनने के लिए फॉर्म-6 भरेंगे, उन्हें आवेदन के साथ अपने माता-पिता की SIR डिटेल्स भी देनी होगी। वहीं, ऐसे पुराने मतदाता जिन्होंने पिछली SIR प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया था, उन्हें भी वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखने के लिए माता-पिता से जुड़ी जानकारी देनी पड़ सकती है।

आयोग ने बताया कि यह व्यवस्था पिछले साल बिहार में शुरू की गई SIR प्रक्रिया के दौरान लागू की गई थी। नए मतदाताओं को फॉर्म-6 के साथ एक घोषणा-पत्र भी भरना होता था, जिसमें माता-पिता की SIR जानकारी शामिल की गई थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि निर्देशों के माध्यम से यह घोषणा-पत्र जोड़ा गया है।

वोटर मैपिंग में मिलेगी मदद

चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि माता-पिता की SIR जानकारी लेने से मतदाताओं की मैपिंग आसान होगी। इससे नए वोटरों से मांगे जाने वाले दस्तावेजों की संख्या भी कम हो सकती है। ऑनलाइन फॉर्म-6 भरने वाले आवेदकों को भी यह घोषणा-पत्र भरना जरूरी होगा, तभी उनका आवेदन आगे बढ़ सकेगा।

EC अधिकारियों के अनुसार, SIR प्रक्रिया का उद्देश्य देश के सभी योग्य नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना है। साथ ही डुप्लीकेट नाम, मृत व्यक्तियों, दूसरे स्थान पर जा चुके लोगों और ऐसे लोगों के नाम हटाना है जो नियमों के तहत वोटर बनने के योग्य नहीं हैं।

चुनाव आयोग ने प्रक्रिया को बताया संवैधानिक

चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए इसे पूरी तरह पारदर्शी और संवैधानिक बताया है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी भी मिली हुई है और इसका मकसद किसी भी योग्य भारतीय नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित करना नहीं है।

कुछ जगहों पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर आरोप लगाए गए थे। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम समेत कई क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावे सामने आए थे। इस पर EC अधिकारियों ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे अपनी आपत्ति दर्ज कराने और फैसले को चुनौती देने का पूरा अवसर दिया जाता है।

UN की चिंता पर EC का जवाब

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष रिपोर्टर्स ने SIR प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने इसमें पारदर्शिता की कमी होने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि SIR प्रक्रिया नियमों के अनुसार और संवैधानिक दायरे में की जा रही है।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी है, ताकि केवल योग्य नागरिकों के नाम ही सूची में रहें और चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। नए नियम के लागू होने के बाद पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को अब आवेदन करते समय अपने परिवार से जुड़ी SIR जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।

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