KNEWS DESK- सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की आराधना, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ मास की अमावस्या इस वर्ष 14 जुलाई 2026, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार के दिन आने के कारण इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पितृ पूजा, तर्पण और दान करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आषाढ़ अमावस्या 2026 तिथि और महत्व
द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या का विशेष महत्व पितरों की शांति और मोक्ष के लिए बताया गया है। इस दिन किए गए श्राद्ध कर्म, तर्पण और दान का कई गुना पुण्य फल मिलता है। मान्यता है कि पितरों की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और उन्नति बनी रहती है।
आषाढ़ अमावस्या 2026 पर पितृ पूजा का शुभ मुहूर्त
पितरों की पूजा और तर्पण के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक। संध्या पूजा मुहूर्त शाम 7:21 बजे से रात 8:22 बजे तक। इन शुभ समयों में पितृ पूजा, तर्पण और दीपदान करना शुभ फलदायी माना जाता है।
स्नान और दान का शुभ समय
आषाढ़ अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:11 बजे से 4:52 बजे तक। यदि किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
आषाढ़ अमावस्या पर पितृ पूजा की विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प और चंदन डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें।
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल, काले तिल, कुश और पुष्प के साथ पितरों का तर्पण करें।
- पितरों का स्मरण करते हुए उनकी शांति और आशीर्वाद की प्रार्थना करें।
- श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र, फल, छाता या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
- संध्या के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करें।
आषाढ़ अमावस्या पर क्या करें?
- पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन एवं दान दें।
- पीपल के वृक्ष की पूजा कर दीपक जलाएं।
- घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें और भगवान विष्णु तथा पितरों का स्मरण करें।
क्या न करें?
- अमावस्या के दिन क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचें।
- मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- पितरों का अपमान या श्राद्ध कर्म की उपेक्षा न करें।
- किसी जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं।
आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि आषाढ़ अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। इस दिन किए गए पुण्य कर्म जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाले माने गए हैं। इसलिए इस अमावस्या पर शुभ मुहूर्त में पितृ पूजा और तर्पण अवश्य करना चाहिए।