Knews Desk- अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। यह फैसला ट्रस्ट की उस अहम बैठक के बाद लिया गया, जो सोमवार को महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, बैठक की शुरुआत दोपहर करीब 3:30 बजे हुई, जिसमें ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने एजेंडा प्रस्तुत किया। बैठक में सबसे पहले चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और हालिया विवाद पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी दौरान गोविंद देव गिरि ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विचार करने का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद सदस्यों के बीच गंभीर विमर्श शुरू हुआ।
बैठक के दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि प्रारंभिक चर्चा के समय चंपत राय और अनिल मिश्रा को अलग रखा जाए, ताकि ट्रस्ट के अन्य सदस्य बिना किसी दबाव के मामले पर विचार कर सकें। इसके बाद यह तय हुआ कि दोनों को बाद में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा, हालांकि फिलहाल दोनों नेता बैठक से दूर रहे। बैठक में शामिल सदस्यों ने मामले को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि हालिया घटनाक्रम से ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है। कई सदस्यों ने इसे आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
महंत नृत्य गोपाल दास ने बैठक के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि वह पूरे घटनाक्रम से अत्यंत आहत हैं। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। बैठक में मौजूद अन्य सदस्यों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि ट्रस्ट के भीतर व्यवस्था संबंधी कुछ कमियां रही हैं, जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। सदस्यों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया।
सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान माहौल काफी गंभीर रहा और सभी सदस्यों ने एकमत होकर यह माना कि इस प्रकरण से व्यापक स्तर पर गलत संदेश गया है। हालांकि, आगे की कार्रवाई और ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर विस्तृत निर्णय आने वाले दिनों में लिए जा सकते हैं। फिलहाल चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद ट्रस्ट में नई स्थिति बन गई है, और इस पूरे मामले पर सभी की नजरें आगामी फैसलों पर टिकी हुई हैं।