योगी कैबिनेट ने “जलालाबाद” का नाम बदलकर “भगवान परशुराम पुरी” रखने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

Knews Desk- उत्तर प्रदेश की राजनीति में नाम परिवर्तन का सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें एक प्रमुख फैसला “जलालाबाद तहसील” का नाम बदलने से जुड़ा रहा। प्रस्ताव के अनुसार अब जलालाबाद को “भगवान परशुराम पुरी” के नाम से जाना जाएगा।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार का मानना है कि यह क्षेत्र धार्मिक दृष्टि से भगवान परशुराम से जुड़ा हुआ माना जाता है और इसी कारण इसका नामकरण उनकी स्मृति और परंपरा को समर्पित करने का प्रस्ताव लंबे समय से विचाराधीन था।

इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर अब आगे की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और केंद्र सरकार की औपचारिक मंजूरी के बाद गजट अधिसूचना जारी की जाएगी। अधिसूचना जारी होते ही नए नाम का उपयोग सभी सरकारी रिकॉर्ड, नक्शों, दस्तावेजों और प्रशासनिक कार्यों में अनिवार्य हो जाएगा।

नाम बदलने के निर्णय को लेकर सरकार का तर्क है कि उत्तर प्रदेश में कई स्थानों के नाम ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पुनर्स्थापन के तहत बदले गए हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय पहचान और धार्मिक विरासत को मजबूत करना है। इससे पहले भी राज्य में इलाहाबाद को प्रयागराज, फैजाबाद को अयोध्या और मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर किया जा चुका है।

हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है। समर्थकों का कहना है कि यह कदम सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाता है, जबकि कुछ आलोचक इसे प्रशासनिक प्राथमिकताओं से ध्यान भटकाने वाला कदम बताते हैं। स्थानीय स्तर पर इस निर्णय का असर प्रशासनिक पहचान से लेकर नक्शों और सार्वजनिक सेवाओं तक देखने को मिलेगा। नए नाम के लागू होने के बाद सभी सरकारी विभागों को अपडेटेड रिकॉर्ड तैयार करने होंगे।

सरकार का कहना है कि इस तरह के नाम परिवर्तन का उद्देश्य केवल प्रतीकात्मक बदलाव नहीं बल्कि क्षेत्रीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देना भी है। “भगवान परशुराम पुरी” नाम के साथ अब यह क्षेत्र एक नई प्रशासनिक और सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित होगा। इस फैसले के बाद अब निगाहें केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी और गजट अधिसूचना पर टिकी हैं, जिसके बाद यह नाम आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा।

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