घाट के इन जंगलों में वर्तमान में करीब 200 से 250 हॉर्नबिल पक्षी मौजूद हैं. यहां कयाकिंग भी की जाती है. अभी बाघों को भी लाने का काम चल रहा है. मानसून के समय यहां की खूबसूरती और बढ़ जाती हैं।
Knews Desk- छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला, जो कभी नक्सल गतिविधियों के कारण पहचान रखता था, अब अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन के लिए चर्चा में है। झरनों, घने जंगलों, वन्यजीवों और दुर्लभ पक्षियों से समृद्ध यह इलाका अब पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां जंगलों में सुरक्षाबलों की आवाजाही और गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहीं अब प्रकृति प्रेमी और बर्ड वॉचर्स कैमरे लेकर यहां पहुंच रहे हैं। कुल्हाड़ीघाट में शुरू हुई हॉर्नबिल सफारी भी पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिससे मध्य प्रदेश, ओडिशा, दिल्ली समेत कई राज्यों के लोग आकर्षित हो रहे हैं।
गरियाबंद के कुल्हाड़ीघाट के जंगल कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माने जाते थे, जिसके कारण लोग यहां आने से कतराते थे। वर्ष 2025 में सुरक्षाबलों ने लगातार अभियान चलाकर कई बड़े नक्सलियों का सफाया किया, जिसके बाद इलाके में शांति लौट आई। अब डर और हिंसा की जगह पर्यटन ने ले ली है। शांत वातावरण और प्राकृतिक संपदा के कारण यह क्षेत्र इको-टूरिज्म के नए केंद्र के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है।

हॉर्नबिल को देखने के लिए जुट रही लोगों की भीड़
जंगलों में अब हॉर्नबिल पक्षियों की आवाज गूंज रही है, जिससे पर्यटक यहां खिंचते चले आ रहे हैं. उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (Udanti-Sitanadi Tiger Reserve) के उपनिदेशक वरुण जैन की पहल पर कुल्हाड़ीघाट के जंगलों में हॉर्नबिल सफारी की शुरुआत की गई है.
फिलहाल जंगलों में हॉर्नबिल पक्षियों की संख्या 200-250 बताई जा रही है. यह पक्षी काफी खूबसूरत होते हैं और आवाज भी मधुर होती है. ऊंचे पेड़ों पर बैठे हॉर्नबिल, जंगल के बीच उनकी उड़ान और प्रकृति का खूबसूरत नजारा कैमरे में कैद करने के लिए अब दूर-दूर से पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं.


सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी भी मौजूद
हार्नबिस के अलावा इन जंगलों में दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी देख सकते हैं. इसे शाहीन बाज या शाहीन फाल्कन (Shahin Falcon) के नाम से भी जानते हैं. यह फाल्कन 320 से 390 किमी/घंटा तक की गति से उड़ सकता है. यह शिकार करने के लिए अपनी स्पीड का ही इस्तेमाल करता है.

कयाकिंग का आनंद, बनाया जा रहा टाइगर बाड़ा
हॉर्नबिल सफारी (Hornbill Safari) के साथ यहां कयाकिंग (Kayaking in Gariaband) जैसी गतिविधियां भी कराई जा रही हैं. आने वाले दिनों में पर्यटकों के लिए कई और नई गतिविधियां शुरू करने की तैयारी है. इतना ही नहीं कुल्हाड़ीघाट क्षेत्र में टाइगर बाड़ा तैयार करने की दिशा में भी एक बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है. मध्य प्रदेश से तीन बाघों को लाने की भी अनुमति मिल चुकी है, जिस पर काम किया जा रहा है.

अगर वन विभाग की योजना जमीन पर इसी रफ्तार से आगे बढ़ी तो आने वाले दिनों में कुल्हाड़ीघाट की पहचान पूरी तरह बदल सकती है. कभी माओवाद का गढ़ फिर सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई का केंद्र और अब हॉर्नबिल सफारी और इको टूरिज्म की नई पहचान गरियाबंद के कुल्हाड़ीघाट के जंगलों की कहानी बदल रही है.