Knews Desk- देश की 23 विपक्षी पार्टियों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि हाल के वर्षों में चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं और कई चुनाव परिणाम जनता की वास्तविक इच्छा को प्रतिबिंबित नहीं करते। साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
पत्र में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उनका दावा है कि इन एजेंसियों का उपयोग केवल जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे राजनीतिक माहौल और चुनावी प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है।
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद आयोग में की गई कई नियुक्तियां निष्पक्षता को लेकर संदेह के घेरे में रही हैं। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र के हालिया विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आशंकाएं सामने आईं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने इसे मतदाता सूची के “शुद्धिकरण” के नाम पर शुरू किया है। आयोग का तर्क है कि मतदाता सूची में अवैध घुसपैठियों के नाम शामिल होने की आशंका है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक और ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे यह साबित हो सके कि बड़ी संख्या में अवैध विदेशी नागरिक मतदाता सूची में शामिल हैं।
पत्र में यह भी मांग की गई है कि भविष्य में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव निकट हों, वहां SIR जैसी प्रक्रिया लागू न की जाए। विपक्ष का सुझाव है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण तभी किया जाए जब चुनाव कम से कम पांच वर्ष दूर हों, ताकि प्रत्येक मतदाता का भौतिक सत्यापन व्यवस्थित ढंग से किया जा सके और किसी भी मतदाता को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसके अलावा विपक्षी दलों ने चुनाव सुधारों के तहत जहां आवश्यक हो, वहां पेपर बैलेट प्रणाली को दोबारा लागू करने पर भी विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बढ़ेगा।
पत्र में यह भी कहा गया कि लोकतंत्र में अंतिम भरोसा न्यायपालिका पर होता है। विपक्षी दलों ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगा और निष्पक्ष तथा पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।