1 लीटर एथेनॉल बनाने में कितना पानी लगता है? सरकार ने सोशल मीडिया दावों को बताया भ्रामक, जारी किए तथ्य

KNEWS DESK- देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। कई पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में करीब 10,000 लीटर पानी खर्च होता है, जिसे सरकार ने पूरी तरह भ्रामक बताया है।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों के अनुसार की जाती है और इसमें जल उपयोग को लेकर फैलाए जा रहे दावे वास्तविकता से बहुत दूर हैं।

1 लीटर एथेनॉल में कितना पानी लगता है?

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि 1 लीटर एथेनॉल के उत्पादन में लगभग 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है। यह पानी आधुनिक डिस्टिलरी यूनिट्स में उपयोग के बाद जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक के माध्यम से पुनः रीसायकल कर लिया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी लगभग न्यूनतम रहती है।

एथेनॉल किससे बनाया जाता है?

सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार, एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से उन कच्चे माल से किया जाता है जो खाद्य सुरक्षा के बाद अधिशेष (surplus) के रूप में बचते हैं, जैसे—मक्का (Corn) अन्य अनाज, कृषि आधारित बायोमास इस प्रक्रिया का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को प्रभावित किए बिना वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तैयार करना है।

E20 फ्यूल को लेकर क्या कहते हैं टेस्ट?

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के परीक्षणों के अनुसार, E20 ईंधन के उपयोग से वाहन उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है। दोपहिया वाहनों में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन लगभग 50% तक कम, चारपहिया वाहनों में लगभग 30% तक कमी इसके साथ ही यह भी बताया गया कि E20 फ्यूल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और सुरक्षित उपयोग के लिए प्रमाणित है।

माइलेज और इंजन को लेकर क्या है सच?

सरकार और ऑटो सेक्टर से जुड़े संगठनों ने इंजन खराब होने या माइलेज में बड़ी गिरावट के दावों को भी खारिज किया है।SIAM और PIB फैक्ट चेक के अनुसार E20 फ्यूल से वाहन की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ता। माइलेज में कोई बड़ा नकारात्मक बदलाव नहीं देखा गया। अधिक ऑक्टेन रेटिंग के कारण पिकअप और परफॉर्मेंस बेहतर हो सकता है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की उपलब्धियां

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने पिछले कुछ वर्षों में देश की ऊर्जा नीति को मजबूत किया है।2014-15 से मई 2026 तक ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत। किसानों को ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक का सीधा भुगतान। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 1.5% (2013-14) से बढ़कर दिसंबर 2025 तक 20% (E20) लक्ष्य हासिल।

सरकार ने साफ किया है कि एथेनॉल उत्पादन और E20 फ्यूल को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कई दावे गलत हैं। वास्तविक वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद है बल्कि देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करता है।