Knews Desk- नीट-यूजी (NEET UG) पेपर लीक विवाद के बाद देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग तेज हो गई है। इसी बीच संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि एनटीए को वैधानिक (Statutory) दर्जा दिया जाए, ताकि एजेंसी को अधिक अधिकार मिलें और भविष्य में परीक्षाओं का संचालन अधिक पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से किया जा सके।बुधवार को आयोजित संसदीय समिति की बैठक में एनटीए के अधिकारियों और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में हाल ही में आयोजित नीट-यूजी पुनर्परीक्षा की समीक्षा भी की गई। समिति ने पुनर्परीक्षा के सफल आयोजन की सराहना की, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया कि अगले साल इतने बड़े स्तर की परीक्षा एनटीए अपने दम पर कैसे आयोजित करेगा।
सूत्रों के मुताबिक, समिति के सदस्यों ने कहा कि इस बार पुनर्परीक्षा इसलिए सफल रही क्योंकि पूरे सरकारी तंत्र ने मिलकर काम किया। प्रधानमंत्री से लेकर विभिन्न मंत्रालयों और प्रशासनिक अधिकारियों तक सभी की सक्रिय भूमिका रही। ऐसे में भविष्य में एनटीए को मजबूत बनाने के लिए उसे कानूनी अधिकार और अधिक संसाधन देने की जरूरत बताई गई।समिति ने परीक्षा प्रणाली में कई बड़े बदलावों का सुझाव भी दिया है। सबसे अहम सिफारिश यह है कि नीट-यूजी परीक्षा केवल एक दिन में कराने के बजाय कई चरणों और कई शिफ्टों में आयोजित की जाए, ठीक उसी तरह जैसे जेईई मेन (JEE Main) परीक्षा होती है। इससे परीक्षा का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में पूरे सिस्टम पर असर नहीं पड़ेगा।
इसके अलावा समिति ने सुझाव दिया कि परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) और पेपरलेस बनाया जाए। हालांकि, सदस्यों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कई छात्रों के पास कंप्यूटर की पर्याप्त सुविधा नहीं होती। इसलिए यदि सीबीटी प्रणाली लागू की जाती है तो सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए।संसदीय समिति ने यह भी सुझाव दिया कि एमबीबीएस, आयुष (AYUSH), नर्सिंग और अन्य मेडिकल कोर्सों के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा कराने के बजाय अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित की जाएं। समिति का मानना है कि इससे परीक्षार्थियों की संख्या कम होगी और परीक्षा का संचालन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।बैठक में परीक्षा प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। समिति का मानना है कि नई तकनीक की मदद से पेपर लीक, नकल और अन्य गड़बड़ियों पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सकता है।
बैठक में एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी और परीक्षा सुधार समिति के अध्यक्ष तथा इसरो के पूर्व प्रमुख आर. राधाकृष्णन भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि परीक्षा सुधार से जुड़ी कई सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, हालांकि इनके लागू होने की कोई निश्चित समयसीमा अभी तय नहीं की गई है।समिति ने परीक्षा केंद्रों पर देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों की समस्या पर भी चिंता जताई। सदस्यों ने कहा कि कई छात्र मामूली देरी की वजह से परीक्षा नहीं दे पाए, इसलिए भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मानवीय और व्यावहारिक समाधान तलाशे जाने चाहिए।गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। अब संसदीय समिति की सिफारिशों के बाद माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के स्वरूप और संचालन में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।