पेट्रोल-डीजल के दामों में जल्द मिल सकती है राहत, ₹2 से ₹4 तक कटौती की उम्मीद

Knews Desk- वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दामों में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं, जिसके बाद विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में भारत में ईंधन के दाम 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक कम हो सकते हैं।

हालांकि, फिलहाल राहत का असर आम उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है, क्योंकि सरकारी तेल विपणन कंपनियों (IOC, BPCL और HPCL) ने अभी तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके चलते ग्राहकों को तत्काल राहत नहीं मिल रही है।

वहीं, भारत की सबसे बड़ी निजी फ्यूल रिटेल कंपनी नयारा एनर्जी ने कीमतों में कटौती की है। कंपनी ने 1 जुलाई से पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की कमी की है। यह कदम लगभग दो साल बाद पहली बड़ी कटौती मानी जा रही है। इससे संकेत मिला है कि निजी क्षेत्र में कीमतों में नरमी की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सरकारी कंपनियों ने अभी इंतजार का रुख अपनाया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में पिछले महीनों के मुकाबले करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और सप्लाई में सुधार के चलते ब्रेंट क्रूड और इंडियन बास्केट क्रूड दोनों में नरमी दर्ज की गई है। भारत की क्रूड बास्केट कीमत भी हाल ही में 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गई है।

एनर्जी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईंधन की कीमतों में तुरंत बदलाव संभव नहीं है क्योंकि तेल कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं, जिसे उन्होंने पहले उच्च कीमतों पर खरीदा था। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर घरेलू बाजार में 2 से 4 हफ्तों की देरी से दिखाई देता है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सरकार और तेल कंपनियां कीमतों में बड़ी कटौती से बच सकती हैं ताकि पहले के नुकसान की भरपाई की जा सके और राजस्व संतुलन बना रहे। इसके अलावा एक्साइज ड्यूटी और अन्य टैक्स संरचना भी कीमतों को प्रभावित करती है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय गिरावट का पूरा लाभ उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिलता।

इस बीच, सरकार ने भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में कमी संभव है, लेकिन यह स्थायी वैश्विक स्थिरता पर निर्भर करेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, संकट के दौरान सरकार ने भारी आर्थिक बोझ उठाकर उपभोक्ताओं को बड़े झटकों से बचाया है।

एलपीजी और एविएशन फ्यूल में भी कुछ राहत देखने को मिली है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 170 से 180 रुपये तक की कटौती की गई है, जबकि विमान ईंधन (ATF) भी सस्ता हुआ है। हालांकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं, तो जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 4 रुपये प्रति लीटर की कटौती संभव है। हालांकि, अंतिम निर्णय सरकार और तेल कंपनियों की नीति पर निर्भर करेगा।

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