‘मुझे मेरे बेटे के पास जाने दो….. लखनऊ अग्निकांड की इनसाइड स्टोरी, 15 मौतों के पीछे छिपा दर्द

Knews Desk- लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुआ भीषण अग्निकांड पूरे प्रदेश को झकझोर गया। उषा मेहता मार्ग स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 9 लोग घायल हो गए। शुरुआती जांच में सामने आया है कि अधिकांश लोगों की मौत आग की लपटों से नहीं, बल्कि जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुई। इस घटना के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं लापरवाही के आरोप में चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों का दर्द हर किसी की आंखें नम कर रहा है। मृतकों में शामिल 24 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव के मामा ने बताया कि आदित्य कोचिंग की पढ़ाई कर रहा था और जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता था। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही उससे मुलाकात हुई थी, लेकिन अब उसके सारे सपने इस हादसे में खत्म हो गए। उन्होंने सरकार से मांग की कि कार्रवाई केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे भवनों के लिए सख्त सुरक्षा नियम बनाए जाएं।

घटनास्थल पर कई मार्मिक दृश्य देखने को मिले। कई परिजन अपने बच्चों के फोन आने के बाद मौके पर पहुंचे और पुलिस से अंदर जाने की गुहार लगाते रहे। एक मां अपने बेटे को बचाने की आस में लगातार रोती रही, लेकिन आग और धुएं के कारण राहतकर्मियों ने किसी को भी इमारत के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी।

मृतकों में 24 वर्षीय अब्दुल रहमान भी शामिल था, जो इसी इमारत में काम करता था और अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसके पिता लकवाग्रस्त हैं और मां की हालत ऐसी नहीं थी कि वे बेटे का शव लेने पोस्टमार्टम हाउस जा सकें। ऐसे मुश्किल समय में उसके बचपन के दोस्त ने परिवार का पूरा साथ निभाया।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के अनुसार, बचाव दल ने कुल 22 लोगों को अस्पताल पहुंचाया था, जिनमें से 15 को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सात घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि दो का इलाज अभी जारी है।

जिस इमारत में आग लगी, वहां बेसमेंट से लेकर दूसरी मंजिल तक कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। यहां पेट शॉप, क्लीनिक, कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और एक 3D एनीमेशन स्टूडियो संचालित हो रहा था। आशंका जताई जा रही है कि आग एसी डक्ट में तकनीकी खराबी के कारण लगी, जिसके बाद धुआं तेजी से पूरी इमारत में फैल गया और लोग बाहर नहीं निकल सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल और अस्पताल पहुंचकर हालात का जायजा लिया, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्रॉमा सेंटर जाकर घायलों से मुलाकात की। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *