डिजिटल डेस्क- बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र में बीते कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने बाढ़ और नदी कटाव के खतरे को अचानक बहुत बढ़ा दिया है। नेपाल के जलग्रहण (कैचमेंट) क्षेत्रों में हो रही भारी वर्षा के कारण कोसी नदी का जलप्रवाह तेजी से बढ़ रहा है, जबकि महानंदा और कनकई नदियां भी रौद्र रूप धारण कर चुकी हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कोसी बराज स्थित कंट्रोल रूम के अनुसार, सोमवार सुबह नदी का डिस्चार्ज 97,935 क्यूसेक दर्ज किया गया, जिसके बाद बढ़ते दबाव को कम करने के लिए बराज के 11 फाटकों को खोल दिया गया है। अधिकारियों का अनुमान है कि यदि नेपाल में बारिश नहीं थमी, तो कोसी का डिस्चार्ज जल्द ही 1.5 लाख क्यूसेक के पार पहुंच सकता है।
किशनगंज में रिकॉर्ड तोड़ बारिश, धंसा पांच स्पैन वाला पुल
सीमांचल का प्रवेश द्वार माने जाने वाले किशनगंज जिले में मॉनसून की बारिश ने भारी तबाही मचाई है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जिले के गलगलिया में 110.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो पूरे बिहार में सबसे अधिक है। भारी बारिश के कारण ठाकुरगंज-मुरालीगाछ मुख्य सड़क पर मानिकपुर गांव के पास स्थित पांच स्पैन वाला एक बड़ा पुल अचानक धंस गया। रविवार को एक भारी वाहन के गुजरने के दौरान पुल का एक हिस्सा नीचे बैठ गया, जिससे ठाकुरगंज और पश्चिम बंगाल के बीच का सीधा संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है। इस मार्ग के बंद होने से करीब 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई है और लोगों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए 25 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
केले और अनानास की खेती करने वाले किसानों पर संकट
ठाकुरगंज-मुरालीगाछ मार्ग के क्षतिग्रस्त होने और आवागमन बंद होने का सबसे सीधा और बड़ा असर स्थानीय किसानों पर पड़ा है। इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अनानास और केले की नकदी फसलें उगाई जाती हैं। पुल टूटने के कारण किसान अपनी फसलों को पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध विधाननगर बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। समय पर फसल मंडी न पहुंचने के कारण फल सड़ने की कगार पर हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका सताने लगी है।
पूर्णिया में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 40 लाख का कटावरोधी काम, 100 घरों पर मंडराया खतरा
उधर, पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड के हरिया गांव से सरकारी दावों की पोल खोलने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ कनकई नदी के किनारे करीब 40 लाख रुपये की लागत से कराया गया कटावरोधी कार्य पहली ही बारिश और बाढ़ के पानी में बह गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस निर्माण कार्य को पूरा हुए अभी महज दो महीने ही हुए थे। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जल संसाधन विभाग के ठेकेदारों और अधिकारियों ने घटिया सामग्री का उपयोग किया, जिसके कारण पहली ही परीक्षा में यह ढांचा ध्वस्त हो गया। इस सुरक्षा बांध के बह जाने से हरिया गांव के करीब 100 से अधिक घरों पर नदी में विलीन होने का खतरा मंडराने लगा है।
महानंदा और कनकई के कटाव से गांवों में दहशत
बैसा प्रखंड के कई पंचायतों में महानंदा और कनकई नदियां तेजी से रिहाइशी इलाकों की जमीन को लील रही हैं। हरिया, काशीबाड़ी, बरडीहा, मंगलपुर, मठुआ टोली और हिजली जैसे दर्जनों गांवों में नदी का कटाव युद्धस्तर पर जारी है। हिजली के मठुआ टोली में तो महानंदा नदी का बहाव सीधे गांव की तरफ मुड़ गया है, जिससे कई परिवारों के आशियाने नदी के मुहाने पर खड़े हैं। यद्यपि जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के इंजीनियर संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखने और जेसीबी से मलबा हटाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि महज कागजी निरीक्षण से उनका घर नहीं बचेगा; इसके लिए तुरंत मजबूत और स्थायी सुरक्षात्मक उपाय करने होंगे।