डिजिटल डेस्क- राजस्थान के नवनिर्मित बालोतरा जिले के पचपदरा थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाले सड़क हादसे की खबर सामने आई है। मंगलवार को पाटोदी कस्बे के पास एक अनियंत्रित रोडवेज बस और कार के बीच हुई आमने-सामने की भीषण टक्कर में चार सगे भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भयावह थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वह लोहे के मलबे में तब्दील हो गई। इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे कोडूका गांव को गहरे सदमे और मातम में डुबो दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, काल के गाल में समाए चारों भाइयों की पहचान बालोतरा के कोडूका गांव निवासी उदाराम (39 वर्ष), रेखाराम (35 वर्ष), जोगाराम (31 वर्ष) और विशनाराम (29 वर्ष) के रूप में हुई है। ये चारों भाई पेशे से मकान निर्माण (मजदूरी व मिस्त्री) का कार्य करते थे। आमतौर पर चारों भाई अलग-अलग जगहों पर काम के सिलसिले में जाते थे, लेकिन मंगलवार को कालेवा गांव में एक ही साइट पर काम होने के कारण चारों ने एक साथ अपनी कार से जाने का फैसला किया था। उन्हें क्या मालूम था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होने वाला है।
पाटोदी के पास जोधपुर जा रही रोडवेज बस काल बनकर आई
चश्मदीदों के मुताबिक, चारों भाई जब अपनी कार से पाटोदी गांव के पास पहुंचे, तभी सामने से तेज रफ्तार में आ रही जोधपुर डिपो की रोडवेज बस उनकी कार के लिए काल बनकर आई। दोनों वाहनों के बीच सीधी भिड़ंत हुई। टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग सहम गए और तुरंत मौके की तरफ दौड़े। हादसे की सूचना मिलते ही पचपदरा थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत और मदद से कार की बॉडी को काटकर उसमें बुरी तरह फंसे चारों भाइयों के शवों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया।
बूढ़े माता-पिता और मासूम बच्चों के सिर से उठा साया, गांव में पसरा सन्नाटा
इस भीषण हादसे के बाद मृतकों के घर और पूरे कोडूका गांव में कोहराम मच गया है। चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा है। बताया जा रहा है कि इस अभागे परिवार में अब केवल वृद्ध माता-पिता, तीन भाइयों की पत्नियां और उनके छोटे-छोटे मासूम बच्चे बचे हैं, जबकि तीसरे नंबर के भाई जोगाराम अभी अविवाहित थे। एक ही झटके में बूढ़े मां-बाप के चारों कमाऊ बेटों की मौत और मासूमों के सिर से पिता का साया उठ जाने से पूरे क्षेत्र की आंखें नम हैं। ग्रामीणों के घरों में आज चूल्हे तक नहीं जले हैं।