KNEWS DESK- देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आ सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है, तो तेल कंपनियों पर दबाव कम होगा और इसका फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
क्रूड ऑयल में आई बड़ी गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
तेल बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि आने वाले हफ्तों में भी कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
क्यों नहीं मिल रही तुरंत राहत?
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन तेल कंपनियां अभी भी पिछले महीनों में हुए नुकसान की भरपाई करने में जुटी हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के दौरान कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थीं। उस समय तेल कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ तुरंत ग्राहकों पर नहीं डाला था। बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी की गई।
ऐसे में कंपनियां फिलहाल अपने वित्तीय संतुलन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।
2 से 5 रुपये तक सस्ता हो सकता है ईंधन
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अगर ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की कमी संभव है।
हालांकि कीमतों में कटौती का फैसला कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा, जिनमें शामिल हैं—रुपये और डॉलर की विनिमय दर,अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई लागत, बीमा खर्च, तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति।
सरकार की नजर बाजार पर
सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है और कंपनियों की स्थिति बेहतर होती है, तो आम जनता को राहत देने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय बाजार के रुझानों पर नजर रखी जा रही है।
भारत पर क्यों पड़ता है ज्यादा असर?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है तो आयात लागत बढ़ जाती है और जब कीमतें घटती हैं तो राहत की संभावना बनती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीद जरूर बढ़ा दी है। यदि अगले कुछ हफ्तों तक क्रूड ऑयल सस्ता बना रहता है, तो देशभर के करोड़ों वाहन चालकों को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां बाजार की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।