कानपुर के भगवत दास घाट पर बुलडोजर का खौफ, 450 घरों की बस्ती खाली करने के नोटिस से हड़कंप

सारिका गुप्ता- उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में कैंटोनमेंट बोर्ड की एक बड़ी कार्रवाई से भगवत दास घाट इलाके में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के बीच हड़कंप और गहरी दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। बोर्ड द्वारा बस्ती खाली कराने का फरमान जारी होने के बाद से ही स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ी हुई है। आशियाना छिनने के इस बड़े संकट के बीच पीड़ित परिवारों ने क्षेत्रीय भाजपा सांसद रमेश अवस्थी का दरवाजा खटखटाया है, जिसके बाद सांसद ने उन्हें राहत का बड़ा भरोसा दिया है।

नोटिस चस्पा होते ही छा गई मायूसी, 20 जून तक घर खाली करने का अल्टीमेटम

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से भगवत दास घाट बस्ती के घरों पर बेदखली का आधिकारिक नोटिस चस्पा किया गया है। इस नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि सभी प्रभावित परिवार 20 जून 2026 से पहले हर हाल में अपने-अपने मकानों को खाली कर दें। यदि तय समय सीमा के भीतर स्वेच्छा से घर खाली नहीं किए गए, तो बोर्ड की ओर से बलपूर्वक ध्वस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि भगवत दास घाट बस्ती में पिछले कई दशकों से करीब 450 से अधिक परिवार रहते आ रहे हैं। कैंटोनमेंट बोर्ड ने पहले चरण के तहत अभी लगभग 45 से 50 मकानों को खाली करने का कड़ा नोटिस थमाया है। अचानक मिले इस कम समय के अल्टीमेटम से लोगों के सामने यह यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है कि वे तपती गर्मी और बरसात के मुहाने पर अपने छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता को लेकर आखिर कहां जाएं।

संकट में फंसे लोग पहुंचे सांसद के द्वार, अपनी बेबसी की सुनाई दास्तान

नोटिस की मियाद जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे बस्ती के लोगों का डर बढ़ता जा रहा है। इसी सिलसिले में रविवार को पूरी बस्ती के सैकड़ों लामबंद लोग कानपुर के नवनिर्वाचित भाजपा सांसद रमेश अवस्थी से मिलने उनके आवास पहुंचे। स्थानीय नागरिकों ने पहले तो सांसद का पारंपरिक स्वागत किया और फिर कैंटोनमेंट बोर्ड के इस तानाशाही रवैये और अपनी बेबसी की पूरी दास्तान उनके समक्ष रो-रो कर बयां की। लोगों ने कहा कि अचानक घर तोड़े जाने की स्थिति में उनकी पूरी जिंदगी सड़क पर आ जाएगी।

“बिना वैकल्पिक व्यवस्था के किसी का घर नहीं टूटेगा”: सांसद रमेश अवस्थी

बस्ती वासियों की इस विकट और मानवीय समस्या को सांसद रमेश अवस्थी ने बेहद संजीदगी और सहानुभूतिपूर्वक सुना। उन्होंने डरे हुए नागरिकों को ढांढस बंधाते हुए साफ शब्दों में आश्वस्त किया कि किसी भी नागरिक को इस तरह बेघर नहीं होने दिया जाएगा। सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि हमारी सरकार की मंशा किसी भी गरीब या आम नागरिक को परेशान करने की कतई नहीं है, बल्कि उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता से समाधान निकालने की है। मैं इस पूरे मामले को लेकर तत्काल शासन और प्रशासन के उच्च अधिकारियों के साथ-साथ कैंटोनमेंट बोर्ड के आला अफसरों से सीधे बातचीत करूंगा। जब तक इन प्रभावित परिवारों के रहने के लिए कोई ठोस वैकल्पिक (वैकल्पिक व्यवस्था) इंतजाम या पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक वहां आगे की कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।”

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