डिजिटल डेस्क- वैश्विक पटल पर जारी उथल-पुथल, ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी की आहट के बीच, उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर से राष्ट्रप्रेम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अगाध श्रद्धा की एक बेहद अनोखी और भावुक मिसाल सामने आई है। कानपुर के रहने वाले एक युवा छात्र आशुतोष यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से आशुतोष ने वैश्विक संकट के इस दौर में देश के एक आम नागरिक और युवा के मन में प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व के प्रति अटूट विश्वास को प्रकट किया है। छात्र ने पत्र में साफ शब्दों में लिखा है कि देश की गरिमा और आपकी सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है, इसके लिए देश का आम मानस हर चुनौती से लड़ने को तैयार है।
सादगी और मितव्ययिता की सराहना, मगर सुरक्षा सर्वोपरि
दरअसल, आशुतोष यादव के इस पत्र को लिखने के पीछे एक बड़ी वजह थी। हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और गलियारों में यह दावा किया जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद की सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले भारी-भरकम सरकारी खर्चों में स्वेच्छा से कटौती करने का विचार कर रहे हैं। इस खबर ने देश के आम नागरिकों की तरह आशुतोष को भी चिंतित कर दिया। छात्र ने अपने पत्र में लिखा कि प्रधानमंत्री की सादगी, उनका त्याग और देश के पैसे को बचाने की मितव्ययिता की भावना यकीनन पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। लेकिन, वर्तमान समय में दुनिया भर के जो भू-राजनीतिक हालात हैं, उसे देखते हुए प्रधानमंत्री की सुरक्षा में रत्ती भर भी ढिलाई या समझौता देशहित में नहीं होगा। आशुतोष ने लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री जी, आप सिर्फ एक जन-प्रतिनिधि या सरकार के मुखिया नहीं हैं, बल्कि आप करोड़ों भारतीयों की उम्मीद, आस्था और प्रेरणा का जीवंत प्रतीक हैं। आप इस देश की अमूल्य धरोहर हैं और आपकी सुरक्षा से खिलवाड़ पूरे राष्ट्र के भविष्य से खिलवाड़ होगा।”
“विदेशी सामान छोड़ेंगे, तंगहाली झेलेंगे, पर देश झुकने नहीं देंगे”
वैश्विक स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट, लाल सागर में व्यापारिक बाधाओं और ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों का जिक्र करते हुए आशुतोष ने पीएम मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को दोहराया। छात्र ने प्रधानमंत्री को भावुक होकर भरोसा दिलाया कि उनका पूरा परिवार देशहित में किसी भी तरह के त्याग के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। “देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बेवजह का दबाव न पड़े, इसके लिए मेरे पूरे परिवार ने गैर-जरूरी विदेशी और आयातित सामानों का पूरी तरह बहिष्कार करने और स्वदेशी अपनाने का संकल्प लिया है। जरूरत पड़ने पर हम देश के लिए तंगहाली झेल लेंगे, भूखे सो जाएंगे, मगर भारत के स्वाभिमान, पहचान और संप्रभुता पर कोई आंच नहीं आने देंगे।” कोरोना महामारी जैसे भीषण संकट काल में देश को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए छात्र ने पूर्ण विश्वास जताया कि आपके विजन से वर्ष 2047 तक भारत निश्चित रूप से एक वैश्विक महाशक्ति और ‘विकसित भारत’ बनेगा।