कोलकाता में सियासी हलचल तेज, अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस पहुंची, मदन मित्रा के ठिकानों पर ED की छापेमारी

KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस वक्त बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर पुलिस पहुंच गई। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी थाना क्षेत्र में दर्ज एक कथित जमीन कब्जा और उगाही के मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस टीम वहां पहुंची थी।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अभिषेक बनर्जी के निजी सचिव सुमित राय को संदिग्ध माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि उनके मोबाइल फोन की लोकेशन इलाके में ट्रेस हुई थी, जिसके बाद टीम जांच के लिए उनके आवास पर पहुंची। हालांकि, पूछताछ के दौरान यह बताया गया कि सुमित राय घर पर मौजूद नहीं हैं।

घटनाक्रम उस समय और भी चर्चाओं में आ गया जब आपदा प्रबंधन टीम की मदद से घर का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया। बताया जा रहा है कि उस समय अभिषेक बनर्जी घर के अंदर ही मौजूद थे। इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति की भी चर्चा रही, क्योंकि उनके उपयोग में आने वाली एक वीवीआईपी कार आवास के बाहर देखी गई। बाद में ममता बनर्जी वहां से रवाना हो गईं।

यह पहली बार नहीं है जब अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसियों के रडार पर आए हों। शुक्रवार को भी सीआईडी की टीम उनके कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची थी। उस समय टीम ‘4 तारीख को डीजे बजेगा’ टिप्पणी से जुड़े मामले में नोटिस देने आई थी। हालांकि अभिषेक उस समय घर पर मौजूद नहीं थे, और बाद में नोटिस स्वीकार करने को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी रही।

इससे पहले, फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी ने उनसे करीब छह घंटे तक पूछताछ की थी। यह मामला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी से संबंधित है, जिसमें आरोप है कि कुछ विधायकों के हस्ताक्षर उनकी अनुपस्थिति में किए गए थे।

इसी बीच कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए TMC विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा के कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई म्युनिसिपल भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में की गई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक की जांच में यह संकेत मिले हैं कि कई नगर निकायों में अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के बदले बिचौलियों के माध्यम से नकद और सोने के रूप में रिश्वत ली गई। मदन मित्रा पर इस तरह की 125 से अधिक कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़े होने के आरोप सामने आए हैं।

फिलहाल दोनों मामलों में जांच जारी है और राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ताधारी दल दोनों ही इस घटनाक्रम को लेकर आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

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