KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान ने नई हलचल पैदा कर दी है। पार्टी में कथित असंतोष और संगठनात्मक तनाव के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का अचानक दिल्ली दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को पहले ममता बनर्जी के साथ रविवार को दिल्ली पहुंचना था, लेकिन वे एक दिन पहले ही शनिवार को राजधानी पहुंच गए। इस अचानक बदलाव ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।
माना जा रहा है कि यह दौरा पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को संभालने और सांसदों के बीच चल रही हलचल पर नजर रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, उनके आधिकारिक कार्यक्रम को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
TMC के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को राजनीतिक हलकों में ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ नाम दिया जा रहा है। आरोप है कि यह असंतोष अभिषेक बनर्जी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और पार्टी के भीतर नेतृत्व संरचना को लेकर असहमति से जुड़ा है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में पार्टी के कई विधायकों ने नेतृत्व से दूरी बनाते हुए अलग रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि 80 विधायकों में से 58 ने किसी न किसी रूप में पार्टी लाइन से अलग रुख दिखाया है, जिसे संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अब चर्चा यह भी तेज हो गई है कि लोकसभा में TMC के कुछ सांसद भी असंतोष की राह पर हैं। पार्टी के कुल 28 सांसदों में से करीब 20 सांसदों के रुख को लेकर राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं।
यदि यह संख्या दो-तिहाई तक पहुंचती है, तो दल-बदल कानून के तहत वे एक अलग गुट के रूप में मान्यता पाने की स्थिति में आ सकते हैं। यह स्थिति TMC के लिए संसद में बड़ा संगठनात्मक संकट पैदा कर सकती है। राज्यसभा में भी TMC के 13 सांसद हैं और वहां भी समर्थन बनाए रखने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
अभिषेक बनर्जी के दिल्ली दौरे को लेकर यह भी चर्चा है कि उन्हें आने वाले दिनों में जांच एजेंसी के सामने भी पेश होना है। ऐसे में उनका यह दौरा राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी के भीतर चल रही मौजूदा उथल-पुथल के बीच उनकी भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं कि क्या वे सांसदों और विधायकों के बीच भरोसा बहाल कर पाएंगे या असंतोष और गहराएगा।
ममता बनर्जी पहले से ही पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। अब ‘ऑपरेशन क्राउन प्रिंस’ ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ हो पाएगा कि TMC अपनी मौजूदा एकता को बनाए रखने में सफल होती है या पार्टी में बड़ा विभाजन देखने को मिलता है।