Knews Desk- ऑस्ट्रेलिया इन दिनों चूहों के भीषण आतंक से जूझ रहा है। देश के कई कृषि क्षेत्रों में चूहों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ गई है कि किसानों की फसलें बर्बाद होने लगी हैं और खाद्य आपूर्ति पर भी खतरा मंडराने लगा है। इस स्थिति को ‘माउस प्लेग’ यानी चूहों की महामारी कहा जा रहा है।
पश्चिमी और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के कई इलाकों में लाखों चूहे खेतों, अनाज भंडारों और यहां तक कि घरों में भी घुस गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर 8,000 तक चूहे पाए गए हैं, जबकि 800 चूहों प्रति हेक्टेयर की संख्या को ही महामारी जैसी स्थिति माना जाता है।
किसानों का कहना है कि चूहे नई बोई गई फसलों के बीज खा रहे हैं, जिससे गेहूं, जौ और कैनोला जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। कई किसानों को करोड़ों रुपये के बराबर आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। हालात इतने खराब हैं कि कुछ लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार अच्छी बारिश, अनुकूल मौसम और फसलों की अधिक पैदावार के कारण चूहों को भरपूर भोजन मिला, जिससे उनकी संख्या तेजी से बढ़ गई। ऑस्ट्रेलिया में इस तरह की चूहा महामारी हर चार से पांच साल में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार कई इलाकों में स्थिति पहले से अधिक गंभीर बताई जा रही है।
स्थिति से निपटने के लिए सरकार और कृषि एजेंसियां विशेष चूहेमार दवाओं और अन्य नियंत्रण उपायों पर काम कर रही हैं। अधिकारियों को चिंता है कि यदि जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर देश के कृषि उत्पादन और खाद्य निर्यात पर भी पड़ सकता है।