KNEWS DESK- सनातन धर्म में कालाष्टमी का पर्व भगवान काल भैरव को समर्पित माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी मनाई जाती है, लेकिन अधिकमास में पड़ने वाली कालाष्टमी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में आने वाली यह तिथि लगभग तीन वर्ष में एक बार आती है, इसलिए इसका आध्यात्मिक महत्व विशेष माना जाता है।
वर्ष 2026 में अधिकमास की कालाष्टमी 8 जून को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना कर व्रत रखते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि काल भैरव की आराधना करने से शनि, राहु और केतु के अशुभ प्रभावों में भी कमी आती है।
काल भैरव पूजा का क्या है महत्व?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान काल भैरव, भगवान शिव के रौद्र स्वरूप माने जाते हैं। उन्हें समय और न्याय का देवता भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक काल भैरव की पूजा करता है, उसके जीवन से भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
कालाष्टमी के दिन किन गलतियों से बचना चाहिए?
कुत्तों के साथ दुर्व्यवहार न करें
कालाष्टमी के दिन कुत्ते को मारना, डांटना या उसे किसी प्रकार की चोट पहुंचाना अशुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन और प्रतीक माना जाता है।
जूठा भोजन न खिलाएं
इस दिन कुत्तों को जूठा या बचा हुआ भोजन नहीं देना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करना काल भैरव का अपमान माना जाता है। इसके स्थान पर उन्हें ताजी रोटी, दूध, गुड़ या मीठे बिस्कुट खिलाना शुभ माना गया है।
व्रत में नमक का सेवन न करें
जो लोग कालाष्टमी का व्रत रखते हैं, उन्हें व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि व्रत के दौरान नमक का सेवन करने से व्रत का पुण्य प्रभावित हो सकता है।
मांसाहार और शराब से दूरी रखें
कालाष्टमी के दिन मांसाहार और मदिरा का सेवन वर्जित माना गया है। इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने और पूजा-पाठ में मन लगाने की सलाह दी जाती है।
अनैतिक कार्यों से बचें
धर्मशास्त्रों में काल भैरव को न्याय और अनुशासन का देवता बताया गया है। इसलिए इस दिन झूठ, छल, धोखा और किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्यों से दूर रहना चाहिए।
कालाष्टमी पर करें ये शुभ कार्य
कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को दूध, रोटी या अन्य खाद्य सामग्री खिलाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा काल भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उनकी विधिवत पूजा करें।
इस दिन उड़द की दाल, काले तिल और सरसों के तेल का दान करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। साथ ही जरूरतमंद बच्चों को भोजन, वस्त्र या उनकी पसंद की वस्तुएं देने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि अधिकमास की कालाष्टमी पर श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान काल भैरव की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति को भय, रोग तथा नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि इस विशेष तिथि को भैरव भक्त पूरे विधि-विधान से मनाते हैं।